हिमाचल प्रदेश के समेज गांव में नहीं मनेगी दिवाली, 16 लोग अब भी लापता, तबाही ने मिटा दिया था नामोनिशां

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शिमला – नितिश पठानियां

31 जुलाई 2024 की रात भूल नहीं पाएगी। ऐसे में भला समेज गांव में कैसे दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। हर बार दिवाली पर गांव दीए की रोशनी से जगमग होता था, लेकिन अब पूरे गांव का ही नामों निशान मिट चुका है। मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला के समेज गांव का है। यहां पर समेज में आई आपदा के बाद अब दिवाली नहीं मनाई जाएगी।

दरअसल, समेज गांव का तो नामोनिशान मिट चुका है। अब बचे हुए घरों में भी दिवाली नहीं मनाई जाएगी। त्रासदी में हुए जान–माल के नुकसान के चलते लोगों ने यह फैसला किया है। गांव के एक युवक ने बताया कि गांव में इस बार दिवाली नहीं मनेगी।

पंचायत प्रधान मोहन कपटिया के बोल 

पंचायत के प्रधान मोहन कपटिया ने बताया कि इस बार समेज गांव में दिवाली नहीं मनाई जाएगी। आसपास के कुछ गांव में भी भीषण त्रासदी के चलते दिवाली नहीं मनाई जाएगी हालांकि, पंचायत की ओर से ऐसे किसी तरह के आदेश नहीं दिए गए हैं लेकिन जिस तरह का नुकसान हुआ है, इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके त्यौहार वैसे ही खत्म हो गए।

समेज गांव के सभी मकान सैलाब में बह गए थे. तस्वीर 31 जुलाई की है.

दरअसल, हिमाचल प्रदेश के शिमला के रामपुर के झाकड़ी में 31 जुलाई 2024 की रात को कुदरत का कहर बरपा था।यहां पर बादल फटने से 36 लोग सैलाब में बह गए थे। इस दौरान करीब 20 दिन तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा लेकिन लापता हुए लोगों में से 20 के ही शव हुए हैं, 16 लोग अब भी लापता हैं। सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया गया था लेकिन कुछ लोगों के शव सतलुज नदी से मिले थे। बता दें कि शिमला और कुल्लू जिला की सीमा पर समेज गांव है।

25 घर बह गए थे

समेज गांव में 25 के करीब घर थे। यहां पर 31 जुलाई की रात को बाढ़ आ गई और फिर स्कूल, अस्पताल सब बह गए।हाईड्रो प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा था। हादसे में कई परिवारों को गहरा सदमा लगा था। इस बार बरसात सीजन में हिमाचल प्रदेश में 31 जुलाई को सबसे बड़ी आपदा आई थी।

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