हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों की सरगर्मी के बीच शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र से एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसने चुनावी माहौल को अचानक बेहद दिलचस्प बना दिया है। हिमाचल के मशहूर पहाड़ी लोक गायक विक्की चौहान की उच्च शिक्षित पत्नी श्वेता चौहान अब सियासी मैदान में उतर चुकी हैं।
श्वेता चौहान ने सरस्वती नगर वार्ड से जिला परिषद सदस्य पद के लिए बीजेपी के टिकट पर नामांकन पत्र दाखिल किया है। नामांकन के दौरान दिखा उत्साह इस बात के संकेत दे चुका है कि आने वाले दिनों में यह मुकाबला काफी रोचक रहने वाला है।
यह सीट इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का गृह क्षेत्र है। इतना ही नहीं, दिवंगत मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल का गृह क्षेत्र बरथाटा भी इसी जिला परिषद वार्ड के अंतर्गत आता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिक्षा मंत्री ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। उत्तराखंड सीमा से सटे शिमला जिले के इस जिला परिषद वार्ड पर अब पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
पहाड़ी गीतों की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाले विक्की चौहान का नाम हिमाचल के घर-घर में जाना जाता है, लेकिन इस बार चर्चा उनके गीतों की नहीं बल्कि उनकी पत्नी श्वेता चौहान की हो रही है। चुनावी मैदान में कदम रखते ही श्वेता ने खुद को केवल “सेलिब्रिटी पत्नी” तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी शिक्षा, व्यक्तित्व और विजन के दम पर अलग पहचान बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।

सबसे ज्यादा चर्चा श्वेता चौहान की शैक्षणिक योग्यता को लेकर हो रही है। आमतौर पर स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों की शिक्षा को लेकर इतनी चर्चा नहीं होती, लेकिन श्वेता का शैक्षणिक रिकॉर्ड लोगों को चौंका रहा है। उन्होंने शिमला के संजौली कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद बीएड की डिग्री हासिल की और शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET भी पास की। इतना ही नहीं, उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषय में भी विशेष अध्ययन किया है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। श्वेता चौहान ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा और UPSC की प्रारंभिक परीक्षाएं भी पास की हैं। यही कारण है कि अब लोग उन्हें केवल किसी प्रसिद्ध गायक की पत्नी नहीं, बल्कि एक बेहद शिक्षित और सक्षम महिला उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं। चुनावी प्रचार के दौरान भी श्वेता खुलकर कह रही हैं कि वे राजनीति में केवल पहचान के सहारे नहीं, बल्कि जनता की सेवा और विकास के विजन के साथ आई हैं।
अपने चुनावी एजेंडे को लेकर भी श्वेता काफी स्पष्ट नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि सरस्वती नगर वार्ड-10 को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। वे क्षेत्र में बेहतर पेयजल व्यवस्था, सड़कों की स्थिति सुधारने, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष फोकस करेंगी। इसके अलावा महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने की बात भी उन्होंने प्रमुखता से उठाई है।
उधर, लोक गायक विक्की चौहान भी सोशल मीडिया के जरिए लगातार अपनी पत्नी के समर्थन में माहौल बना रहे हैं। हिमाचली संगीत प्रेमियों के बीच उनकी लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। ‘नीरू चाली घूमदी’, ‘झुमके-झुमके’ और ‘किंदे चाली बाठणें’ जैसे सुपरहिट गीतों ने उन्हें प्रदेश भर में खास पहचान दिलाई है। अब यही लोकप्रियता चुनावी माहौल में भी देखने को मिल रही है।

जुब्बल-कोटखाई की राजनीति में इस बार यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यहां जनता के सामने एक ऐसी उम्मीदवार है, जिसके पास शिक्षा, प्रशासनिक समझ और जनसंपर्क का मजबूत मेल दिखाई दे रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पहाड़ों की संगीत दुनिया से जुड़ा यह चर्चित परिवार 19 पंचायतों वाले इस जिला परिषद वार्ड के करीब 21,700 मतदाताओं का विश्वास जीत पाता है या नहीं।
हालांकि मुकाबला एकतरफा नहीं माना जा रहा। कांग्रेस ने श्वेता चौहान के खिलाफ अनुभवी और संगठन में सक्रिय रहने वाली नेहा मेहता को मैदान में उतारकर चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। नेहा मेहता लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति से जुड़ी रही हैं और क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी लगातार बनी हुई है।
वहीं शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में नजर आ रहे हैं। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर रोहित ठाकुर की सौम्य छवि और क्षेत्र में उनकी पकड़ को कांग्रेस अपने पक्ष में माहौल बनाने के तौर पर देख रही है। ऐसे में अब यह चुनाव केवल दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, लोकप्रियता और संगठनात्मक ताकत की सीधी टक्कर बनता दिखाई दे रहा है।

