
शिमला – जसपाल ठाकुर
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा खलीनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या भागवत भास्कर साध्वी सुश्री भाग्यश्री भारती जी ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। साध्वी जी ने प्रवचनों में कहा की छोटी आयु में ही श्रीकृष्ण ग्वाल बालों के साथ गाय चराने जाने की जिद करते हैं।
भगवान की गौ चराने की लीला हमें गौ सेवा के लिए प्रेरित करती है।साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने कहा कि गौ की रक्षा के लिए स्वयं परमात्मा इस धरती पर आते हैं,पर उनकी संतान इस सेवा से क्यों वंचित रहती है। वैदिक काल में मानव जीवन का आधार यज्ञ,दान आदि को माना गया।यदि गहराई से विचार किया जाए तो इन सबका आधार सिर्फ गो ही है।
गो प्रेम कारण ही हमारे देश में गोकुल,गोवर्धन व गोपाल इत्यादि नाम प्रचलित है।गायों की संख्या के आधार पर भारतीय किसानों को नंद,उपनंद,नंद राज इत्यादि नाम दिए जाते थे।भारत की संपन्नता गाय के साथ ही जुड़ी हुई है लेकिन बड़े दुख की बात है कि देश में पूजा योग्य गाय की हालात अति दयनीय हो गई है।
सदियों से अहिंसा का पुजारी भारत देश आज हिंसक व मांस निर्यातक देश के रूप में उभरता जा रहा है । देश के विभाजन से पहले देश में केवल 300 बूचड़खाने थे परंतु आज देश में इनकी संख्या हजारों हो चुकी है। आज देश में कानूनी व गैर कानूनी तौर पर हजारों ही बूचड़खाने चल रहे हैं।
साध्वी जी ने गौमाता के महत्व को बताते हुए कहा कि हम सब पर परमात्मा की बहुत बड़ी कृपा है की हमारे शरीर के लिए आवश्यक स्वर्ण गाय के दूध से प्राप्त हो जाता है। पंचगव्य का सेवन करके लाइलाज रोगों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।इसीलिए हमें गौ सेवा अवश्य करनी चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने गोवंश के साथ प्रेम करके समस्त मानव जाति को गौ माता के प्रति उदार बनने की प्रेरणा दी है।
यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य बनता है कि हम गोवंश का पालन करें और भारतीय मान बिंदुओं की रक्षा करें। कथा में नरेंद्र सूद,अभिमन्यु एवं जनक भट्टी ने परिवार सहित पूजन किया।
सुरेश भारद्वाज(शहरी विकास मंत्री), श्रीमती विजय ज्योति सेन, कंवर पृथ्वी विक्रम सेन, डॉ मस्तराम शर्मा,एडवोकेट शिवपाल मनहंस,एडवोकेट नीलकमल सूद,पूर्व डिप्टी मेयर राकेश कुमार शर्मा, ऋषि कपूर अनूप वैद, श्रीमती विभूति डडवाल, विजय झिंगटा,पूरणमल (पार्षद) आदि ने आरती में शामिल होकर प्रभु का आशीर्वाद लिया।
स्वामी धीरानन्द जी ने बताया की दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन के लिए कामधेनु के नाम से एक विशेष सेवा प्रकल्प चलाया जा रहा है।जिसके तहत भारत के विभिन्न राज्यों में संस्थान की गौशाला हैं।
पूरे उत्तर भारत में संस्थान की कामधेनु गौशाला को सर्वोत्तम गौशाला का गौरव प्राप्त हुआ है। कथा का समापन प्रभु की मंगल आरती के साथ किया गया। उसके बाद सारी संगत के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई।
