
धर्मशाला – राजीव जस्वाल
स्कूलों में बेहतर पढ़ाई के लिए आधुनिकता पर जोर है, लेकिन शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास नहीं हो रहे हैं। शिक्षकों की कमी पढ़ाई व अनुशासन में भी बाधा बन रही है। ऐसे में स्कूलों में रिक्त चल रहे अध्यापकों के पदों से अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
जिला कांगड़ा के प्राइमरी स्कूलों में जेबीटी के 647 पद रिक्त हैं। जिले के 1697 प्राइमरी स्कूलो में जेबीटी के 2677 पद मंजूर हैं। जिनमें से 647 पद खाली पड़े हैं। हालांकि शिक्षा विभाग की माने तो शिक्षकों की कमी के बावजूद विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दी जा रही है।
शिक्षा विभाग बेहतर व गुणात्मक शिक्षा देने का दावा भी कर रहा है। जबकि अभिभावक सरकारी स्कूलों में रिक्त चल रहे पदों को लेकर परेशान है और विभिन्न माध्यमों से स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती की मांग भी करते रहते हैं। लेकिन बावजूद इसके शिक्षा विभाग में 647 रिक्त पदों को भरने के लिए कसरत शुरू नहीं की गई है, जिससे अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे में बिना अध्यापकों के अच्छी व गुणात्मक शिक्षा विद्यार्थी कैसे प्राप्त करेंगे।
यह बोले उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा
उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा मोहिंद्र कुमार ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाई जाती है, जिस कारण स्कूलों में विद्यार्थियों की एडमिशन बढ़ी है। प्राइमरी स्कूलों में जेबीटी के पद रिक्त हैं, जिनके बारे में सरकार को सूचित कर दिया है।
