
हमीरपुर – अनिल कपलेश
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के मनोविज्ञान विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। रोजाना औसतन 70 मरीज मनोविज्ञान ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिक मरीज सिजोफ्रेनिया (मानसिक विकार) और अवसाद से पीड़ित हैं।
चिकित्सकों के अनुसार जिले में प्रति हजार में से तीन व्यक्ति सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं। सिजोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी है। भ्रम, दु:स्वप्न, उदासीनता, बोलने की क्षमता में कमी, अन्य आवाजें सुनाई देना, चुपचाप बैठे रहना आदि इसके लक्षण हैं।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में कोविड-19 महामारी के बाद मानसिक रोगियों में करीब 30 फीसदी इजाफा हुआ है। पूर्व में जहां अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 55 मरीज आते थे, अब इनकी संख्या 70 के करीब हो गई है।
महामारी के बाद नौकरी छूटने या अन्य भय के चलते अधिक लोग मानसिक रोगों का शिकार हुए हैं। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रोजाना उपचार के लिए आने वाले लोगों में से 30 फीसदी लोग किसी न किसी तरह के मानसिक रोग का शिकार हैं।
ऐसे में चिकित्सकों ने मानसिक रोगों के बचाव के लिए शुरुआत में ही मनोवैज्ञानिक को दिखाने और उपचार शुरू करने की सलाह दी है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डॉ. संदीप ने कहा कि जिले के एक हजार में से तीन व्यक्ति सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं।
जबकि, अस्पताल आने वाले 30 फीसदी मरीज किसी न किसी तरह के मानसिक रोग से ग्रसित हैं। सिजोफ्रेनिया दिवस हर साल 24 मई को मनाया जाता है। इस बीमारी का अगर शुरुआत में ही पता चल जाए तो इसका इलाज दवाइयों व थैरेपी के माध्यम से संभव है। इ
सलिए अगर किसी को ये लक्षण दिखें तो तुरंत मनोवैज्ञानिक को दिखाएं। महामारी के बाद अस्पताल आने वाले मानसिक रोगियों में करीब 30 फीसदी का इजाफा हुआ है।
