
व्यूरो, रिपोर्ट
नहीं नहीं अभी इंसानियत नही मरी है. अभी सभी के जहन में उस बेटे की ही तस्वीर है जो अपनी माँ के शव को कंधे पर ले के जा रहा है. लेकिन यह दूसरी तस्वीर भी उसी कांगड़ा जिला की है, जहां स्थानीय प्रशासन चर मराया नज़र आया और हालात यहां तक पहुंच गए कि कोरोना संक्रमित के संस्कार के लिए प्रशासन चार पी पी ई किट तक नही दे पाया.
लेकिन इंसानियत को शर्मसार होने से बचाते हुए एक युवक ने बिना पी पी ई किट के ही शव को चौथा कंधा दिया. और बिना पी पी इ किट के ही शव का अंतिम संस्कार करवाया.
इससे पहले इस कोरोना मरीज को हॉस्पिटल ले जाने के लिए एम्बुलेंस नही मिली तो घर बालो ने अपने निजी वाहन में मरीज को अस्पताल पहुंचाया लेकिन अस्पताल में जब एक जिंदगी शव बन गई तब भी यह प्रशासन परिबार को एम्बुलेंस नही दे पाया और महिला के बेटे को अपनी माँ का शव गोद मे रख कर चाचा की गाड़ी में लाना पड़ा.
संस्कार के लिए चार पी पी ई किट भी अस्पताल से खुद जा कर लानी पड़ी. अब लोग डरें हुए है और सबाल कर रहे है की कहाँ है? इस दौर में बड़े बड़े अधिकारी, बड़ा प्रशासनिक अमला और हमारे हुक्मरान? आपको बता दे यह सारा मामला देहरा विधानसभा की गुलेर पंचायत का है जहां एक 50 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला ने दम तोड़ दिया.
