जसूर बस स्टॉप पर बनने वाला शौचालय पांच सालों से अनदेखी का शिकार

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नूरपुर, देवांश राजपूत

उपमण्डल नूरपुर का प्रमुख व्यापारिक कस्बा जसूर के निचले बस स्टॉप पर बनने वाला शौचालय पांच सालों से अनदेखी का शिकार होकर रह गया है। शौचालय न होने के कारण आसपास के क्षेत्र में फैल रही गंदगी से स्वच्छता अभियान को भी पलीता लग रहा है।

करीब पांच साल पहले तत्कालीन सांसद शांता कुमार के जसूर आगमन पर स्थानीय लोगों ने यह समस्या उनके सामने रखी थी जिसके चलते उनके द्वारा सांसद निधि से उक्त शौचालय के लिए तीन लाख की राशि भी स्वीकृत हुई थी लेकिन इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी स्थानीय दुकानदारों और बाजार में आने वाले ग्राहकों की सुविधा के लिए शौचालय निर्माण की योजना ही आजतक धरातल पर उतर ही नही पाई है।

उक्त बस स्टॉप के आसपास करीब डेढ़ सौ से दो सौ छोटे बड़े दुकानदार अपना व्यवसाय करते हैं और इसी स्थान से प्रतिदिन सैंकड़ों लोग विभिन्न जगहों को जाने वाली बसों के इंतजार के लिए रुकते हैं लेकिन उक्त बस स्टॉप पर शौचालय की व्यवस्था न होना हर व्यक्ति का मुंह चिढ़ाती है। मजबूरन लोगों को खुले में अपनी लघुशंका आदि क्रिया को निपटाने में विवश होना पड़ता है।

उक्त जगह सबसे ज्यादा समस्या महिला वर्ग को उठानी पड़ती है जो घंटों बसों के इंतजार के लिए यहां रुकती हैं और उक्त जगह शौचालय की सुविधा न होने के कारण आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध का वातावरण बना रहता है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनावों के दौरान तो लोगों को वायदों के बड़े बड़े सपने दिखाते हैं लेकिन हकीकत में जनता को मिलने वाली सुविधा के लिए सिवाय लंबे इंतजार के कुछ भी हाथ नहीं लगता। लोगों का कहना है पंचायत चुनाव निपटे भी कई माह बीत गए हैं संबंधित विभाग और स्थानीय पंचायत को सुविधा शीघ्र उपलब्ध करवानी चाहिए।

वही जसूर पंचायत प्रधान ज्योति देवी ने बताया की कस्बा जसूर पहले कमनाला पंचायत में शामिल था। अब जसूर और कमनाला अलग अलग पंचायत बन गई है। जसूर के निचले बस स्टॉप पर बनने वाले शौचालय की पहली किश्त भी कमनाला पंचायत में चली गई थी जिसे शिफ्ट करवाकर जसूर पंचायत में करवाया जा रहा है। राशि मिलने के उपरांत ही कार्य सम्भव हो पाएगा।

खंड विकास अधिकारी डॉ रोहित शर्मा ने बताया कि पंचायत कमनाला से इस संबंध में बात हुई थी और उन्होंने बताया था कि वो जल्द-से जल्द कार्य का निर्माण शुरू कर देंगे, लेकिन बार-बार कहने के बाद भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। क्योंकि कई बार जगह की कमी या कई बार एनएच की जमीन की समस्या के चलते बार बार टालते रहें।

अब जसूर व कमनाला दो अलग-अलग पंचायतें बन गई है। अब उच्चाधिकारियों से बात कर रहे हैं कि ये शौचालय किस पंचायत के अंतर्गत बनाया जाए। जैसे ही इस मामले में स्पष्ट निर्णय आ जाता है उसी पंचायत को आदेशित करके शौचालय शीघ्र अति शीघ्र बनाया जाएगा।

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