हिमखबर डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारी शक्ति बंदन अधिनियम भले ही वर्ष 2029 में लागू होना हो लेकिन धर्मशाला उपचुनाव में महिला नेत्रियां अभी इसे इसे भुनाने में जुट गई हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में आधा-आधा दर्जन से अधिक महिला नेत्रियां सक्रिय हैं।
कुछ नगर निगम से सक्रिय राजनीति में आई हैं तो कुछ पंचायती राज संस्थाओं में काम करके भाजपा व कांग्रेस में ओहदा लेकर काम करते हुए अपना हक जता रही हैं। ऐसे में जब प्रदेश की राजनीति में भगदड़ मची हुई है तो असमंजस के दौर में महिलाओं ने भी अलग-अलग प्लेटफार्म पर अपनी अपनी दावेदारियां जताने शुरू कर दी हैं।
दिल्ली से लेकर शिमला तक यह महिला नेत्रियां अपनी-अपनी धमक दिखाते हुए टिकट मांग रही हैं। नारी शक्ति बंदन अधिनियम लाने सहित प्रधानमंत्री के बार-बार महिलाओं की लोकतंत्र में भागेदारी की बातों ने महिला नेत्रियों में ऊर्जा भर दी है।
खासतौर पर जिला परिषद सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद महिलाओं को दर्जनों पंचायतों में संपर्क का अवसर मिल जाता है। ऐसे में अपने संपर्क अभियान से ही यह महिला नेत्रियां दम दिखा रही है। महिला मोर्चा और महिला विभाग में सक्रिय भूमिका ने महिलाओं को आगे बढऩे का रास्ता भी दिखा दिया है।
प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला में लोकसभा के साथ विधानसभा का उपचुनाव भी हो रहा है। धर्मशाला में नगर निगम होने के चलते शहरी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को महापौर से लेकर पार्षद तक बनने का अवसर मिलता है।
धर्मशाला नगर निगम की ही बात करें तो अब तक दो पुरुष मेयर बनने के साथ दो महिला महापौर भी अपना नाम निगम की सूची में दर्ज करवा चुकी हैं। इसी तरह जिला परिषद सदस्य के लेकर जिला परिषद अध्यक्ष तक की कुर्सी का संचालन महिला नेत्रियां कर रही हैं।
पंचायत प्रधान सहित राजनीति दलों में स्थान बनाकर महिलाओं ने अब नारी शक्ति बंदन अधिनियम को 2029 के बजाए अभी से लागू करने को बिगुल बजा दिया है। ऐसे में पुरुष टिकटार्थियों को भी भविष्य की चिंता सताने लगी है।

