थाना क्षेत्र के गांव नगला कन्हई का रहने वाले दो भाई शिव नंदन और ब्रजनंदन के बीच महज एक बीघा खेत है। इसमें दो परिवारों का भरण पोषण करना मुश्किल है। जिस वजह से शिव दिल्ली में रह कर एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। दिवाली के त्योहार पर वह घर आया हुआ था।


भाई से लिपट कर रोई मधु
दो बच्चों को खोने के बाद मधु बेतहाशा चीख रही थी, हर किसी को बता रही थी कि उसकी ही एक गलती की वजह से उसके बच्चों की जान चली गई, लेकिन उसकी आंखो से आंसू नहीं बह रहे थे। मानो उसके आंसू सूख गए थे। साथ आई महिलाएं उसे चुप करने का प्रयास करती रहीं लेकिन सभी नाकाम रहे। इस दौरान मधु का भाई वहां आया तो मधु उस से लिपट कर रोने लगी।

खो बैठी होश
मधु बहकी बहकी बातें करने लगी, कभी कहती कि अपने भांजो को बाहर लेकर आओ और घर चलो, तब वह भाई दौज मनाएगी। तो कभी खुद को बच्चों की मौत का जिम्मेदार बताते हुए रोने लगती। कह रही थी कि उसने डायन बनकर अपने ही बच्चों को खा लिया। मां मधु की ये हालत देख वहां मौजूद हर किसी की आंखे नम हो गईं।

चाय भी नहीं पी, फिर भी बिगड़ गई हालत
गांव नगला कन्हई में जहरीली चाय पीने से हुई घटना के बाद शिवनंदन का भाई ब्रजनंदन भी जिला अस्पताल पहुंचा, तीन लोगों की खबर सुनने के बाद वह भी पास ही बेड पर लेट गया। जब पूछा गया कि क्या उसने भी जहरीली चाय पी है तो इंकार कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद ही वह बेहोश हो गया, इसके बाद चिकित्सकों ने उसे अस्पताल में भर्ती करने के साथ ही उपचार दिया।