मनरेगा मज़दूरों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा माँगपत्र

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श्रमिक कल्याण बोर्ड के लाभ जारी करने और मज़दूरी बढ़ाने की उठाई मांग

मंडी – अजय सूर्या

मनरेगा निर्माण मज़दूरों ने आज ओल्ड बस स्टैंड सरकाघाट पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया और बीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को माँगपत्र भेजा। जिसका नेतृत्व खण्ड अध्यक्ष सत्या देवी औऱ महासचिव दिनेश काकू और जनवादी महिला समिति की अध्यक्षा प्रोमिला पठानिया ने किया। मनरेगा और निर्माण मज़दूर फेडरेशन के राज्य महासचिव और पूर्व ज़िला परिषद भूपेंद्र सिंह भी इस दौरान उपस्थित हुए।

उन्होंने इस अवसर पर कहा कि राज्य में बनी सुखू सरकार ने मनरेगा और निर्माण मज़दूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर कर दिया है और उनके पिछले दो सालों के लाभ भी रोक दिये हैं।पिछले तीन महीने से मज़दूरों का पंजीकरण कार्य भी रोक दिया गया है।जिसके विरोध में आज प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और सरकार ने जल्दी फ़ैसला नहीं बदला तो मज़दूर सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ शिमला में विशाल प्रदर्शन करेंगे।

भूपेंद्र सिंह ने कहा की मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग की एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ये निर्णय ले लिया है और श्रमिक कल्याण बोर्ड में इस पर कोई चर्चा नहीं कि गयी है। मुख्यमंत्री का ये फ़ैसला मज़दूर विरोधी और भवन एवं अन्य सन्निर्माण मज़दूर कल्याण क़ानून 1996 का उलंघन भी है।

सरकार ने 8 फ़रवरी को ये अधिसूचना जारी कर दी है कि दस लाख रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले भवन के निर्माण के लिए गृह उपकर अदा करने पर ही उसमें काम करने वाले मज़दूर को बोर्ड का सदस्य बनाया जा सकेगा।जबकि हिमाचल के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेस क़ानून लागू ही नहीं किया गया है तो गृह उपकर कौन और कैसे अदा करेगा।

उन्होंने कहा कि ये फैसला ग़लत तरीके से लिया गया है।यही नहीं सुखू सरकार के पदभार ग्रहण करने के दो दिन बाद ही 12 दिसंबर को मनरेगा मज़दूरों को भी बोर्ड का सदस्य बनाने और उनके लाभ रोकने का फ़ैसला ले लिया गया है। जिसके चलते अब महदूरों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षण छात्रवृति, विवाह शादी, प्रसूति और मैडीकल सहायता तथा अन्य सभी प्रकार की सहायता रोक दी गई है।

इसके अलावा यूनियन ने ये भी मांग की है कि मनरेगा मज़दूरों को कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में किये वादे अनुसार 350 रु दिहाड़ी दी जाये और कार्यदिवसों की संख्या बढ़ाकर 200 दिन की जाए। ऑनलाईन हाज़री और बीस कार्यों की शर्त हटाई जाये।

सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम रोज़गार सेवक तथा तकनीकी सहायक लगायें जायें। आठ घंटे काम करवाने के बाद कार्यों की असेसमेंट का नियम रद्द किया जाये औऱ मनरेगा मज़दूरों के लिए अलग शेड्यूल बनाया जाये। पंचायतों में जनरल हैड के काम भी जॉब कार्ड धारक उन मनरेगा मज़दूरों से करवाये जायें जो ग़रीब और जरुरतमंद होते हैं।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना के लिए अगले साल के लिए बजट 20 हज़ार करोड़ रुपये कम कर दिया है और जानबूझकर कर इसका गला घोंटा जा रहा है। यूनियन केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आगामी 5 अप्रैल को दिल्ली संसद भवन के बाहर देशव्यापी प्रदर्शन करने जा रही है जिसमें धर्मपुर खण्ड के मज़दूर भी भाग लेंगे।

उन्होंने प्रदेश की सुखू सरकार को भी चेतावनी देते हुए कहा कि उसने राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड के लाभ जल्दी जारी नहीं किये तो यूनियन शिमला में भी विरोध प्रदर्शन करेगी।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर जनवादी महिला समिति की अध्यक्षा प्रोमिला पठानिया, मान सिंह,संजय कुमार, शोमा देवी,सोनिया, रत्नी देवी, सुनीता देवी, लत्ता देवी, विना देवी, रजनी, ब्यासा, रीना, कला देवी, रूमा, निशा देवी, बर्फी देवी, उमा देवी सहित दर्ज़नो मज़दूरों ने भाग लिया।

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