जान जोखिम में डाल एक घंटा पैदल चली बारात

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मणिकर्ण घाटी के चोज में बादल फटने से पुल बह जाने पर बारात ले जाने में आई दिक्कत, अभी सामान्य नहीं हुई स्थिति।

कुल्लू – आदित्य

मणिकर्ण घाटी के चोज में गत बुधवार को फटे बादल से हुए तबाही के मंजर ने ग्रामीणों को भारी दिक्कत में डाल दिया है। मंजर की घटना को चार दिन बीत गए, लेकिन अभी जन-जीवन अस्त-व्यस्त हैं।

इस मंजर के बीच चोज गांव में शनिवार को शादी समारोह चल रहा है। मंजर के जख्म अभी ग्रामीणों के बिलकुल ताजा हैं, लेकिन शादी समारोह के दिन को टालना मुश्किल था। कठिनाइयों के दौर के बीच बारात एक घंटा पैदल चली।

पहाड़ीनूमा रास्ता और आगे उफान पर चली पार्वती नदी और संकरे और जोखिम भरे रास्ते को होकर बारात को ले जाना पड़ा। पहाड़ी से पत्थर गिरने का डर भी ग्रामीणों को सताता रहा।

बड़ी सतर्कता के साथ ग्रामीणों ने जोखिम भरे रास्ते से बारात को ले गए। वहीं, शाम को अंधेरे में बारात वापस भी जोखिम भरे रास्ते से ही लानी पड़ी।

यदि बुधवार को चोज गांव में बादल फटने की घटना से क्षेत्र तहस-नहस न होता और गांव के साथ पार्वती नदी के ऊपर सीधा गोज नामक स्थल यानि मणिकर्ण-भुंतर मणिकर्ण सडक़ को जोड़ता पैदल पुल पार्वती नदी में न समा जाता, तो बारात को आज दिक्कतों का सामना न करना पड़ता।

पार्वती नदी पर बने पुल से होकर ग्रामीण मात्र पांच या सात मिनट में सडक़ पर पहुंच जाते थे, लेकिन बाढ़ के मंजर से आज ग्रामीणों को दिक्कत में डाल दिया है।

अब ग्रामीणों को अपने गांव से बाहर अपने कार्य से चलने के लिए जोखिम वाले पैदल रास्ते से होकर कसोल पुल होकर आना-जाना पड़ रहा है।

रात के अंधेरे में तो यह रास्ता और भी खतरनाक है। इसी रास्ते से ग्रामीणों ने शनिवार को बारात को गांव से बड़ी कठिनाइयों के दौर से कसोल सुरक्षित जगह लाया। इसके बाद बारात आगे गई।

वहीं, शनिवार को जब रात के समय बारात आई, तो इस दौरान भी बड़े चौकने होकर ग्रामीणों को बारात को वापस चोज गांव पहुंचना पड़ा।

छलाल पंचायत के प्रधान चुनी लाल ने बताया कि बादल फटने से नजदीक रास्ता तहस-नहस हो गया है। वहीं, पुल भी बह गया है।

ऐसे में शनिवार को गांव में एक विवाह समारोह था। चोज गांव से ही छलाल पंचायत के वार्ड चोज के सदस्य की बारात जोखिम भरे रास्ते से होकर मजबूरन ले जानी पड़ी।

उन्होंने कहा कि जिन पैदल रास्ते से यह बारात गई, यह रास्ता भी जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना न घटती तो बारात भी गांव से सडक़ तक पांच से सात मिनट में पहुंच जाती।

लेकिन एक घंटा पैदल चलना पड़ा और हर बारात के साथ गए और जब बारात वापस आई, तो ग्रामीणों को सभी लोग मुस्तैदी के साथ ले जाने पड़े।

उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जल्द पुल निर्माण का निर्माण कार्य किया जाए, ताकि ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

अभी तक चला है रेस्क्यू 

एसडीएम कुल्लू प्रशांत सरकैक ने बताया कि शनिवार को चौथे दिन भी रेस्क्यू अभियान चला।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव-राहत कार्य में डटी रहीं, लेकिन वहां पर भारी मलबे में खुदाही करना कठिन है। रेस्क्यू में ग्रामीणों का सहयोग भी मिल रहा है।

मशीनरियां वहां जा नहीं सकती, कुछ सूचना है कि उस दिन दो लोगों को बहते हुए ग्रामीणों ने देखा है, उसके लिए पार्वती नदी में जाकर रेस्क्यू किया जाएगा। लापता लोगों का अभी कोई सुराग नहीं मिला है।

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