धर्मशाला सचिवालय की पार्किंग बनी गोशाला

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गोबर के ढेर और बदबू में गाडिय़ां पार्क करना बना चुनौती, वर्षों बीत जाने के बाद भी नहीं बन पाई व्यवस्था

धर्मशाला – राजीव जस्वाल

प्रदेश की दूसरी राजधानी के सचिवालय परिसर के वाहर बनाई गई पार्किंग धीरे-धीरे गोशाला बनने लगी है। गोबर के ढेर व बदबू से पार्किंग ही नहीं आसपास से गुजरना भी दूभर होने लगा है।

धर्मशाला में पहले ही पार्किंग एरिया की कमी है और उस पर पूर्व में जो पार्किंग स्थल बनाए गए थे, उनकी मेंटिनेंस भी नहीं हो पा रही है। सचिवालय परिसर व डीसी आफिस के बाहर के तहत पार्किंग बनाई गई थी।

वर्षों बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री, मंत्रियों व प्रशासनिक अधिकारियों के कक्षों के बाहर बनी पार्किंग को व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले लोगों में रोष है।

सचिवालय की पार्किंग में यदि कोई गाड़ी लेकर चला जाए तो नीचे पैर रखना मुश्किल हो जाता है। गोबर से अटी पड़ी पार्किंग में बदबू फैली रहती है। यहां न तो वाहनों को तरीके से खड़ा करने के लिए किसी ही ड्यूटी है और न इसके रखरखाव का जिम्मा किसी को दिया गया है, जिसके चलते कई लोग सुबह गाड़ी खड़ी कर जाते हैं और देर शाम तक वहां गाडियां खड़ी रहती हैं, जिससे राजमर्रा के काम के लिए आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ता है।

मिनी सचिवालय की पार्किंग हालांकि काफी बड़ी है, लेकिन जब सफाई की बात आती है तो पशुओं ने अपना घर बना ली है। गाय का गोबर पार्किंग में इतना ज्यादा है कि पार्किंग की हालत खस्ता हो गई है कोई व्यक्ति गाड़ी लगाने के बाद पांच मिनट भी वहां खड़ा नहीं हो सकता, पार्किंग में गंदगी के साथ बदबू भी बहुत होती है।

वहीं आसपास के दुकानदार भी इस व्यवस्था से परेशान हैं, जिन्हें बदबू से हर रोज परेशान होना पड़ता है। जिला प्रशासन इस मामले को लेकर हर वार हल करने की बात करता है, लेकिन वर्षों भी कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

नई पार्किंग नहीं बन पाई

शहर में पूर्व में बनाई गई करीब चार पार्किंग के बाद आसपास के इलाके में कोई नई पार्किंग नहीं बन पाई है, जिससे वाहनों की बढ़ती संख्या के चलते अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए धर्मशाला आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ता है और गैर पार्किंग एरिया में चालान होने पर मायूस होकर लौटना पड़ता है।

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