
ज्येष्ठ माह में मां का आशीर्वाद लेने से भक्तों की पूरी होती है हर मनोकामना
पालमपुर- बर्फू
पालमपुर से 20 किलोमीटर दूर खैरा गांव में स्थित माता सती सुन्यारी का मंदिर असंख्य लोगों की आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र है जहां सूनी गोद भरने का आशीर्वाद लेने के लिए असंख्य लोग वर्ष भर आते हैं और मां की अपार कृपा से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं ।
ऐसी मान्यता है कि जयेष्ठ माह में यहां माथा टेकने से नि:संतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है और लोगों की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
जनश्रुति के अनुसार माता सुनयारी सन 1772 में इस स्थान पर अपने पति सुनयार के साथ चिता में जलकर सती हुई थी ! यह दंपत्ति खैरा के साथ लगते गांव सुनयार खोला में रहता था जो आज भी इसी नाम से प्रचलित है ।
बताया जाता है कि वर्ष 1772 में उनके पति का देहांत हुआ था और उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार हेतु इस स्थान पर लाया गया था।
माता सुनयारी नि:संतान थी और जब अपने पति को गोद में लेकर सती होने के लिए चिता पर बैठी तो चिता को अग्नि देने वाला कोई नहीं था ।
माता सुनयारी ने चिता पर बैठकर कहा कि जो पुरुष उसके स्वर्गीय पति की चिता को मुखाग्नि देगा उसे वह मनवांछित वरदान देंगी ।
माता की बात सुनकर खैरा के मियां जयमल सिंह कटोच जो स्वयं भी निसंतान थे उन्होंने मुखाग्नि देना स्वीकार कर लिया ।
जैसे ही मियां जयमल सिंह कटोच ने चिता को आग दी माता सुनयारी ने उन्हें दो पुत्र और एक पुत्री होने का वरदान दिया और आग्रह किया कि वह इसी दिन जयेष्ठ माह के नौ प्रविष्टे अगले वर्ष से इस स्थान पर छिंज कुश्ती मेले का आयोजन अवश्य करें ।
माता सुन्यारी के वरदान से अगले साल मियां जनरल सिंह को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ और उन्होंने बड़ी श्रद्धा व खुशी के साथ पहला छिंज मेला वर्ष 1773 के जयेष्ठ माह के 9 प्रविष्टे को आयोजित किया और यह सिलसिला आज भी जारी है।
मियां जयमल सिंह को वरदान के अनुसार एक पुत्र एवं पुत्री ओर पैदा हुए । यही कारण है कि आज खैरा में सभी वर्गों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं।
