
ज्वाली – अनिल छांगू
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ के बैनर के नीचे हिमाचल प्रदेश के अंदर छठे वेतन आयोग लागू होने से उत्पन्न वेतन विसंगतियों को लेकर प्रदेश के जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहा था। पुरानी पेंशन बहाली एवं वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारी निरंतर अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रख रहे थे लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों की राजनीतिक प्रताड़ना की जा रही है। इसकी गाज अब राज्य के शिक्षकों पर गिरी है। जिसमें कि अधिकांश शिक्षकों का तबादला कर दिया गया। यह बात पूर्व संसदीय सचिव शिक्षा विभाग नीरज भारती ने अपने फेस बुक के माध्यम से कही है।
उन्होंने कहा कि जिला शिमला से शिक्षकों को चम्बा तबादला कर दिया गया है। वहीं जोइया मामा के नारे लगाने वाले सिरमौर के 4 शिक्षकों को जिला शिमला में ट्रांसफर किया गया है। कांगड़ा जिला के शिक्षकों को रोहड़ू और मंडी के शिक्षकों को जुब्बल स्थांतरित किया गया है। इसके साथ ही अन्य जिलों के कुछ शिक्षकों को भी राजनीतिक तौर पर प्रताड़ित करने के लिए अलग अलग स्थानों पर भेजा गया है।
कर्मचारी किसी भी सरकार की रीड की हड्डी होते हैं। कर्मचारियों के सिर पर भी सरकारें अपने काम को अमलीजामा पहनाती है लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि वर्तमान की भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार सभी तरह से सरकारी कर्मचारियों का उत्पीड़न करने में लगी है।
उन्होंने कहा कि जो काम करेगा उसे पैसा भी चाहिए उसके भी परिवार के सदस्य होते हैं, बाल बच्चे होते हैं, माता पिता होते हैं, उसकी अपनी भी जरूरतें होती हैं और जैसे जैसे महंगाई बढ़ती जा रही है, वैसे वैसे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है लेकिन जब कोई कर्मचारी काम के बदले अपने वेतन के लिए सरकार के आगे बात करे तो उसे प्रताड़ित किया जाता है। यही हाल आज प्रदेश की भाजपा सरकार अपने सरकारी कर्मचारियों के साथ कर रही है।
उन्होंने कहा कि, ना तो उनकी वेतन विसंगितें दूर की जा रही है और ना ही सारी उम्र नौकरी करने के बाद बुढ़ापे में पेंशन का कोई समाधान निकाला जा रहा है और जब इन्ही मुद्दों के लिए सरकारी कर्मचारी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए कोई आंदोलन कर रहे हैं तो उनको राजनितिक तौर पर परेशान किया जा रहा है।
क्या काम के बदले पैसा उनका हक नहीं है? क्या सारी उम्र नौकरी करने के बाद पैंशन उनका हक नही है?
उन्हने कहा कि जब कोई कर्मचारी अपने हक की बात करे तो उसे प्रताड़ित किया जाता है। विधायक या मंत्री 5 साल के लिए बना जाता है लेकीन सरकारी कर्मचारी सारी उम्र सरकार की नौकरी करता है और जो भी फैसले मंत्रिमंडल की बैठक में या फिर क्षेत्रीय स्तर विधायक करते हैं उनको यही सरकारी कर्मचारी अमलीजामा पहनाते हैं, लेकीन वर्तमान की भाजपा सरकार इनका राजनीतिक तौर पर प्रताड़न कर रही है।
उन्होंने कहा कि मैं निजी तौर पर सरकारी कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करता हूं और चाहता हूं कि इनको प्रताड़ित करने की बजाए इनकी समस्याओं का हल निकाला जाए। वरना भारतीय जनता पार्टी को आने वाले समय में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अभी तो सिर्फ़ शुरुआत हुई है। अगर समय रहते विचार नहीं किया गया तो चुनावों में यही कर्मचारी भाजपा को भगाएंगे ।
