
ज्वाली- अनिल छांगु
जो कार्य सरकार व पंचायत नहीं करवा पाई वे कार्य समाजसेवियों ने जनता के सहयोग से कर दिखाया है। उपमंडल ज्वाली के अंतर्गत पंचायत हरसर में वर्षों से कोई भी श्मशान घाट नहीं था और हर बार जनता विधायकों पंचायत प्रतिनिधियों से श्मशान घाट निर्माण करवाने की मांग करती रही लेकिन श्मशान घाट का निर्माण ना हो सका। आखिरकार समाजसेवी निर्मल शर्मा ने श्मशान घाट के निर्माण हेतु अपनी जमीन दान दी व समाजसेवी पंडित शिवदेव, पंडित विपिन शर्मा सहित जनता से मिलकर श्मशान घाट निर्माण के लिए सहयोग मांगा।
समाजसेवियों ने अपने व जनता के सहयोग से बढ़िया श्मशान घाट का निर्माण कर दिया। इस श्मशान घाट को स्वर्ग धाम का नाम दिया गया है। श्मशान घाट के साथ में शेड का निर्माण ब चारदीवारी लगाई गई है। पीने के लिए पानी की टंकी बनाई गई है तथा हाथ-पैर धोने के लिए बावड़ी निर्मित की गई है। बैठने के लिए सिमटेड बेंच लगाए गए हैं।
श्मशान घाट में करीब 6 फुट ऊंची शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। जो कि हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है। अंदर प्रवेश करने के लिए दोनों तरफ गेट लगाए गए हैं। चारदीवारी के साथ-साथ फूलों की क्यारियां निर्मित है। जिनमें रंग बिरंगे फूल श्मशान घाट की सुंदरता को बढ़ाते हैं। करीब 1 कनाल जमीन पर बनाए गए श्मशान घाट की गूंज दूर दूर तक है। किसी की मृत्यु होने पर जो दूर दूर से लोग श्मशान घाट में आते हैं, तो श्मशान घाट की प्रशंसा करने से अपने आप को रोक नहीं पाते हैं।
पंडित शिवदेव, निर्मल शर्मा रोजाना सुबह 4:00 बजे श्मशान घाट पहुंचकर साफ सफाई करने में जुट जाते हैं तथा देर रात्रि को ही घर वापस आते हैं। उनकी रोजमर्रा का यही रूटीन है। निस्वार्थ भाव से श्मशान घाट की साफ-सफाई व अन्य कार्य करते हैं। पंडित शिवदेव व निर्मल शर्मा ने कहा कि उनको यह कार्य करने में सकून मिलता है।
उन्होंने कहा कि पंचायत में कोई भी शमशान घाट नहीं था तथा जब किसी की मृत्यु होती तो उसको दूरदराज पोंग डैम की जमीन में जलाना पड़ता था। इसको देख कर उनमें यह योजना आई कि अपने स्तर पर ही श्मशान घाट का निर्माण करवाया जाए। इसी के तहत जनता से भी सहयोग लिया तथा अब स्वयं हम इसकी साफ़ सफाई व देखभाल करते हैं। उन्होंने कहा कि लाल चंदन पीपल व बट सहित रंग बिरंगे फूल व फलदार पेड़ लगाए गए हैं।
