
ज्वाली-माध्वी पंडित
दो माह के मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के चलते बिरान पड़ी पौंग झील में अब एकदम से रौनक आ गई है। प्रतिबंध हट गया तथा रविवार चार बजे के उपरांत मछुआरों ने झील में जाल बिछा दिए। किश्तियों को लेकर मछुआरों ने पौंग झील के गहरे पानी मे मछली पकडऩे के जाल बिछा दिए तथा मछुआरों के चेहरे पर रौनक लौट आई।
रविवार को सारी रात मछुआरे पौंग झील किनारे ही किश्तियों को खड़ा करके सुबह होने का इंतजार करते रहे। सोमवार को सुबह होते ही मछुआरे किश्तियों को लेकर जालों को देखने के लिए झील में उतर गए। अधिकतर मछुआरों के हाथ पहले दिन ही खाली रहे, जबकि कइयों की दिवाली हो गई।
मछुआरे मछलियों को लेकर सोसायटीज में पहुंचने शुरू हो गए हैं तथा कई अभी भी झील में जालों को देख रहे हैं। पौंग झील में 2300 मछुआरे मछली पकडऩे का कार्य करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं तथा झील खुलने के कारण उनके चेहरे काफी खिले हुए दिख रहे हैं।
