दो साल तक बिना काम के वेतन लेता रहा पंचायत सचिव, किया लाखों रुपये का गबन, पढ़ें पूरा मामला

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हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार से संबधित एक मामले में बिना काम के वेतन लेने वाले पंचायत सचिव तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के खिलाफ विजिलेंस ने चार्जशीट तैयार की है। अब फारेंसिक लैब से आरोपित के लिखावट के नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है।

शिमला, जसपाल ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार से संबधित एक मामले में बिना काम के वेतन लेने वाले पंचायत सचिव, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के खिलाफ विजिलेंस ने चार्जशीट तैयार की है। अब फारेंसिक लैब से आरोपित के लिखावट के नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी, राज्य विजिलेेंस एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगा।

जांच में 12.55 लाख का गबन होना साबित हुआ है। इस संबंध में पिछले साल अक्टूबर में विजिलेंस ने मामला दर्ज किया था। मामला सोलन जिले का है। इस केस में तत्कालीन बीडीओ कुनिहार भी आरोपित हैं। वह कोर्ट से अग्रिम जमानत पर हैं। इस कारण गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

क्या है मामला

यह कर्मचारी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय से दो वर्ष से अधिक समय तक गायब रहा, लेकिन गैर कानूनी तरीके से बिना काम के हर माह वेतन प्राप्त करता रहा। जैसे ही इसे विजिलेंस जांच की भनक लगी तो एक ही दिन में उपस्थिति रजिस्टर में बैक डेट से उपस्थिति दर्ज की।
आरोप है कि सचिव ने 29 माह के वेतन का 12.55  लाख का गबन किया है। विजिलेंस के पास कहीं से शिकायत आई कि चमयावल के तत्कालीन पंचायत सचिव देवेंद्र कालिया सरकारी कार्य की बजाय अपने निजी कारोबार में व्यस्त हैं। प्रारंभिक जांच में पाया कि 2016 ये दधोगी पंचायत में बतौर सचिव तैनात था। बीडीओ ने गलत रिकार्ड को सत्यापित कर इसे विजिलेंस को पेश किया। आरोप है कि अधिकारी ने जानबूझ कर गलत रिकार्ड तैयार करने में मदद की है।

 

विज‍िलेंस जांच पूरी

डीएसपी विजिलेंस सोलन संतोष कुमार शर्मा ने कहा पंचायत सचिव ने 12. 55 लाख का गबन किया है। इसमें बीडीओ की भी संलिप्तता रही है। जांच लगभग पूरी हो गई है, केवल रिपोर्ट आने का इंतजार है।

रतवाड़ी के पंचायत सचिव के खिलाफ मिली अभियोजन मंजूरी

सरकारी पैसों का गबन करने के मामले में सोलन की रतवाड़ी पंचायत के सचिव के खिलाफ विजिलेंस को संबंधित अथोरिटी से अभियोजन मंजूरी मिल गई है। अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 2017-18 में विजिलेंस के पास शिकायत आई थी। इसमें पंचायत कार्यों मेें अनियमितता बरतने और पंचायत प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर करने के आरोप लगाए गए थे।

प्रारंभिक जांच में पाया है कि पंचायत सचिव ने अलग-अलग तारीख के एक लाख 36 हजार 400 रुपये के चार चैक का भुगतान करवाया । पैसा निजी व्यक्ति के खाते में डलवाया। इसे खुद इस्तेमाल किया। डीएसपी विजिलेंस संतोष शर्मा ने अभियोजन मंजूरी मिलने की पुष्टि की है। इसमें विजिलेंस को फारेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई है।

कब हुआ मामला दर्ज

विजिलेंस ने 2019 में मामला दर्ज किया था। जांच में पाया कि पंचायत सचिव ने आपराधिक षड्यंत्र रच किसी व्यक्ति से प्रधान के जाली हस्ताक्षर करवाए। वह भी आरोपित बनाया है। अब आरोपित सचिव निर्मल सिंह व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी।

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