
धर्मशाला, राजीव जस्वाल
वैसै तो सरकार ग्रामीण स्तर पर कई योजनाएं धरातल पर उतार रही है। लेकिन जब ग्राम पंचायतों के अपने भवन ही न हो, तो कई जो महत्वपूर्ण विकास कार्य लटक जाते हैं। ऐसा ही मामला धर्मशाला विकास खंड की तहत आती बाघनी पंचायत का सामने आया है। जिसका पंचायत भवन नगर निगम के दायरे में आने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यही नहीं बल्कि नगर निगम भी भवन को हैंड ओवर करने का दबाव बना रहा है। पहले यह भवन सिद्धबाड़ी पंचायत में पड़ता था। 20 सितंबर 2015 को नगर निगम का गठन होने के बाद सिद्धबाड़ी पंचायत का विलय नगर निगम में हो गया और बाघनी पंचायत का गठन होने के बाद पंचायत भवन नगर निगम के अधीन चला गया। अव पंचायत ने प्रशासन के समक्ष नए पंचायत भवन की मांग रखी है ताकि स्वतंत्र तौर पर पंचायत का कार्य चल सके।
बाघनी पंचायत प्रधान सुरेश धीमान, उप-प्रधान विजय कुमार, वार्ड पंच रानी देवी, राकेश कुमार, अंजू देवी का कहना है कि पिछले छह साल से उधारी के भवन में ही पंचायत का कार्य चल रहा है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि या तो इसी भवन को पंचायत को हस्तांतरित किया जाए या फिर नए भवन का फंड मुहैया कराया जाए। नगर निगम भवन को खाली करने का दबाव बना रहा है।
कई बार इस संबंध में जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष भी मांग रखी गई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी हल नहीं निकल पाया। भवन नगर निगम के दायरे में आने से काफी दिक्कत पेश आती रही है। नगर निगम के दायरे में आने से पूर्व इस भवन का निर्माण पंचायत स्तर पर ही करवाया गया था। ऐसे में इसी भवन को बाघनी पंचायत का कार्यालय रहने दिया जाना चाहिए। नगर निगम पंचायत भवन को जल्द ही हैंड ओवर करने के लिए पंचायत पर दवाव वना रहा है। मौजूदा स्थिति ऐसी है कि इतने कम समय में भवन का निर्माण होना संभव नहीं।
उधर नगर निगम धर्मशाला महापौर ओंकार नैहरिया ने बताया कि बाघनी पंचायत जिस भवन में अपना कार्य चला रही है वह नगर निगम के दायरे में आता है। पंचायत को भवन नगर निगम को हैंड ओवर करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। वहीं उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव मिला है। पंचायत कहीं भी सरकारी जमीन चिन्हित कर प्रोपोजल भेजे प्रशासन फंड मुहैया करवा कर भवन का निर्माण जल्द करवा देगा।
