
कांगड़ा, राजीव जसवाल
थोड़ा सा फ़्लैशबैक में चलते हैं
साल 2017 में जब जयराम ठाकुर अचानक मुख्यमंत्री बने तो अचानक ही एक और नाम सामने आया, यह नाम था कांगड़ा के प्रतिष्ठित शर्मा घराने के मुनीष शर्मा का।
वजह थी , नए सीएम के साथ मुनीष की सालों पुरानी दोस्ती, कोई मुनीष को डिप्टी चीफ मिनिस्टर तो कोई मिनी चीफ मिनिस्टर का खिताब देने शुरू हो गया।
मजे की बात यह भी रही कि यह खिताब भाजपाई जमात देती रही और सियासी सौतिया डाह के चलते आहें भर कर कोसती भी रही, जाहिर सी बात है अगर बड़े आदमी के साथ दोस्ती होगी तो सम्मान और कोसने के बहाने भी बड़े ही मिलेंगे।
खैर अब कोविड के दौर में दोस्ती के पैमाने पर मुनीष ने अपना कद साबित किया है तो साथ ही जनता की उम्मीदों की कसौटी पर भी खुद को खरा साबित कर दिया है।
अभी तक मुनीष शर्मा सीएम रिलीफ फंड में खुद और अपने साथियों के सहयोग से लाखों रुपए दे चुके हैं, पहली के बाद दूसरी लहर में यह राशि 50 लाख रुपए के करीबन जमा हो चुकी है।
जबकि जनता में कोविड से जुड़ी राहत सामग्रियों और राशन वगैरा का कोई हिसाब ही नहीं है हर हफ्ते राशन से भरी दर्जनों गाड़ियां कांगड़ा के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रहीं हैं।
जहां जरूरत वहां मुनीष शर्मा हाजिर मिल रहे हैं, मेडिकल इक्यूपमेंट भी इसी मुहिम में टीम मुनीष शर्मा लोगों को मुहैया करवा रही है।
काबिलेतारीफ
खास और काबिलेतारीफ बात यह है कि मुनीष द्वारा बांटी जा रहीं मेडिकल एवं राशन किट्स में उनकी “ब्रैंडिंग” कहीं भी नहीं हुई है।
लोगों को मदद मिल जाती है,लेकिन कौन मदद कर गया यह उनको पता नहीं चलता, यहां तक कि मुनीष की टीम के लोग भी यह नहीं बताते कि सामान कहां से और किसने भेजा है।
दोस्ती और मानवता की मिसाल
मुनीष की दोस्ती और मानवता की मिसाल अब उन लोगों के लिए सबक से कम नहीं है,जिन्होंने जयराम ठाकुर से सब हासिल किया,पर जब उनका साथ देने का वक़्त आया तो गायब हैं।
मुनीष को कोसने वाले अब सरकार और संगठन के साथ कोस भर भी नहीं चल पा रहे हैं। अपने लिए तो दुनिया कमाती है,पर जो दुनिया पर अपनी कमाई लगाए वो लोग बहुत कम होते हैं।
ऐसे में यह कहना गलत न होगा कि यह सराहनीय कार्य कांगड़े वाले मुनीष ने पूरी ताकत से शुरू किया हुआ है.
