शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह से लेकर लकड़ी तक का संकट खड़ा होने लगा

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नूरपुर, देवांश राजपूत

हिमाचल प्रदेश में कोविड संक्रमण के फैलने के साथ ही अब मृतकों की संख्या में लगातार बढ़ती जा है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह से लेकर लकड़ी तक का संकट खड़ा होने लगा है।

इसे देखते हुए अब राज्य वन विकास निगम ने कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार कराने वाली एजेंसियों को मुफ्त में लकड़ी मुहैया कराने का फैसला लिया है। वन मंत्री राकेश पठानिया ने निगम के सभी डिपो को निर्देश जारी कर दिए हैं ।

निर्देश दिए हैं कि वह फिलहाल डिपो में मौजूद लकड़ी की बिक्री न करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर वन भूमि को अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाने के लिए इजाजत देने भी कह दिया गया है। इस क्रम में शिमला में पहले ही कनलोग में वन भूमि को जेसीबी लगाकर साफ कराया जा चुका है।

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वन भूमि पर शेड नहीं बनाया जा सकता, लेकिन शवों के अंतिम संस्कार के लिए वन विभाग की जमीन व लकड़ी मुहैया कराई जाएगी। प्रदेश में कोरोना से तकरीबन हर रोज 25 से 30 लोगों की मौत हो रही है। चूंकि इन शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में शवों के आने से संस्कार के लिए जगह मिलने में मुश्किल आने लगी थी।

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