हिमखबर डेस्क
‘हिमाचली टोपी’ जिसे पहाड़ी टोपी भी कहा जाता है, सिर्फ फैशन की निशानी नहीं है—यह पहचान और सम्मान का प्रतीक है। हिमाचल प्रदेश के लोग इसे नाटी (पारंपरिक नृत्य), शादियों, त्योहारों और रोज़मर्रा के कामों के दौरान पहनते हैं। यह अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति प्रेम दिखाने का एक तरीका है।
वैसे तो हिमाचल टोपी अपने आप में ही सुंदर दिखती है, लेकिन इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ाने के लिए इसे हिमालयी मोनाल (जो हिमाचल का पूर्व राज्य पक्षी भी था) के चमकीले पंखों से सजाया जाता रहा है। हालांकि, अवैध शिकार और इस प्रजाति की घटती आबादी को देखते हुए, असली मोनाल के पंखों का उपयोग सख्ती से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अब लोग हिमाचल टोपी को सजाने के लिए मोनाल की कलगी की जगह कृत्रिम कलगी का उपयोग करते हैं जो आमतौर पर चांदी या सोने की बनी होती है। आज यह कृत्रिम कलगी लाखों लोगों की पसंद बनी हुई है। हिमाचल में इस कत्रिम कलगी को बढ़ावा दने का श्रेय जाता है हिमाचली लोक गायक इंद्रजीत को।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक टोपी में मोनाल पक्षी की कलगी के उपयोग से इस सुंदर एवं संरक्षित पक्षी पर पड़ रहे खतरे को देखते हुए प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक इंद्रजीत नें एक सराहनीय पहल की। इसके तहत उन्होंने मोनाल की वास्तविक कलगी के स्थान पर चांदी से बनी कृत्रिम कलगी के उपयोग को बढ़ावा दिया, जिससे वन्यजीव संरक्षण को समर्थन मिला।

इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में उनके गीत “पाखली माणु” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस गीत के माध्यम से लोक गायक इंद्र जीत ने मोनाल पक्षी की असली कलगी के स्थान पर कृत्रिम कलगी को अपनाने का संदेश दिया, जो लोगों के दिलों को छू गया। इस संदेश को व्यापक जनसमर्थन मिला और लाखों लोगों ने कृत्रिम कलगी को अपनाया तथा उसे काफी पसंद किया।
इसका प्रभाव इतना व्यापक रहा कि हिमाचल प्रदेश के बाहर भी कृत्रिम कलगी का चलन (ट्रेंड) देखने को मिला। इस गीत को यूट्यूब पर लगभग 1.34 करोड़ से अधिक व्यूज़ प्राप्त हुए, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचा। इस पहल के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक टोपियों में कृत्रिम कलगी को अपनाना शुरू किया, जिससे मोनाल पक्षी के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली। इंद्रजीत को इस सराहनीय कार्य के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया गया है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत ने राज्य की लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के भी उन्होंने अपने लोक गीतों के माध्यम से हिमाचली परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और पहाड़ी जीवन शैली को व्यापक जनमानस तक पहुंचाया है।
इंद्रजीत ने अपने गीतों के माध्यम से नशा मुक्ति, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रभावी रूप से उठाया है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

