हिमखबर डेस्क
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अभी पेट्रोल-डीजल पर कोई सेस नहीं लगा है। भाजपा नेता गुमराह करने वाले बयान दे रहे हैं। अभी केवल सेस लगाने के अधिकार के लिए बिल लाया गया है। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद तय किया जाएगा कि कितना सेस लगाना है। सेस को नहीं लगाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
बुधवार कों विधानसभा सदन में प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर संशोधन अधिनियम-2026 को विधानसभा में पारित किया है। इसमें जरूरतमंद वर्गों, विशेषकर विधवाओं व अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में आसपास के लोगों से एंटी टैक्स वसूली के लिए पास बनाने का निर्णय कैबिनेट बैठक में होगा। इससे पूर्व नेता विपक्ष जयराम ठाकुर और विधायक राकेश जंबाल, रणधीर शर्मा, राकेश कालिया और हरदीप बावा ने सदन में यह मामला उठाया।
प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा विधायकों के आरोपों पर तल्खी दिखाकर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा जैसे आरडीजी के पक्ष में प्रदेश के साथ खड़ी नहीं हुई।
अब वैसे ही सेस को लेकर भी जनता में भ्रम फैला रही है कि पेट्रोल और डीजल का सेस उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा, जबकि संशोधन विधेयक में स्पष्ट है कि यह सेस व्यापारियों से वसूला जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर अधिकतम पांच रुपये प्रति लीटर तक सेस लगा सकती है। यह सेस पेट्रो पदार्थों की बिक्री करने वाले व्यापारियों से लिया जाएगा, जबकि आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
इस सेस से प्राप्त राशि का उपयोग विधवाओं, अनाथ बच्चों सहित अन्य जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए किया जाएगा, ताकि उन्हें आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। इससे आम जनता पर बोझ डाले बिना सामाजिक योजनाओं को मजबूती मिलेगी और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।
यह पहल प्रदेश में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि सेस कितना लगेगा यह अभी तक तय नहीं है और जयराम ठाकुर दिल्ली में जाकर बयान दे रहे हैं कि पांच रुपये बढ़ा दिए गए।
शसीएम सुक्खू ने कहा कि तथ्य यह है कि राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई वृद्धि नहीं की है। केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री रहने के बावजूद अनुराग ठाकुर को कानून का ज्ञान नहीं है। सेस से संबंधित विधेयक अभी कानून नहीं बना है।
इसके बावजूद जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। वास्तविकता यह भी है कि हरियाणा सहित कई भाजपा शासित राज्यों में ईंधन की कीमतें आज भी हिमाचल प्रदेश से अधिक हैं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में एंट्री टैक्स का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने प्रश्नकाल में हिमाचल की गाड़ियों पर टैक्स को लेकर प्रश्न पूछा।
इस पर सीएम ने जवाब में कहा कि जितना हल्ला हो रहा है, उतना बढ़ाया नहीं गया है। हिमाचल की केवल कमर्शियल गाड़ियों पर टैक्स लगा है। टोल की नीलामी के जरिये 185 करोड़ का लक्ष्य रखा था, बोली 228 करोड़ तक गई है।
रोजाना आने वालों को पास
कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने सदन में कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा पंजाब के साथ लगता है, वहां लोग हर रोज काम के सिलसिले में पंजाब आते जाते हैं, रिश्तेदारियां भी हैं, क्या सरकार रोज का काम करने आने वालों को पास देगी।
सीएम बोले हिमाचल की गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं लगता है, इसको अब फास्टटैग के साथ जोड़ा गया है, हिमाचल के लोगों को पास देने पर विचार किया जा सकता है।
रोजाना आने वालों को मिले रियायत
पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने उत्तराखंड से हर रोज पांवटा के औद्योगिक क्षेत्र में आने वालों को रियायत देने की बात कही। नालागढ़ से कांग्रेस विधायक हरदीप बाबा ने इसका समर्थन किया। बाबा ने सदन में कहा कि सीमावर्ती इलाकों में कम से कम 5 किलोमीटर के दायरे के लोगों को पास दिया जाए। सीएम ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।
तब तो तीन बैरियर पर टैक्स देना पड़ेगा
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में कहा कि पंजाब सरकार के वित्त मंत्री ने भी विधानसभा में एंट्री टैक्स लगाने और बैरियर लगाने की बात कही है, इससे बॉर्डर पर लोगों को 3 बैरियर पर टैक्स देना पड़ेगा, भारी बोझ जनता पर पड़ेगा, सरकार इस मुद्दे पर क्या कर रही है?
तथ्यों पर नहीं बोलते, पंजाब के मंत्री व भाजपा नेता
एंट्री टैक्स पर उठे सवालों पर सीएम सुक्खू ने कहा कि पंजाब के वित्त मंत्री तथ्यों पर नहीं बोलते, जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर भी तथ्यों पर नहीं बोलते।
पेट्रोल डीजल पर सेस को लेकर भी गलत तथ्य दिए, अभी केवल सेस लगाने के अधिकार के लिए बिल लाया है, इसको राज्यपाल की मंजूरी मिलनी है, उसके बाद सरकार ये तय करेगी कि सेस लगाना है या नहीं, हो सकता है सरकार कोई सेस न लगाए।
कैबिनेट में विचार किया जाएगा
इसके साथ ही एंट्री और टोल टैक्स मेरे समय से नहीं बल्कि 30 वर्षों से चल रहा है, इसे इनफ्लेशन देखते हुए निर्धारित किया गया है, अभी लागू नहीं किया है, कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर फिर से विचार किया जाएगा। विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बयानबाजी कर रहा है।

