48 घंटे वाले अल्टीमेटम से पलटे ट्रंप, अब पांच दिन तक पावर प्लांट पर नहीं करेंगे अटैक
हिमखबर डेस्क
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमरीका और ईरान के बीच टकराव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही 48 घंटे वाले अल्टीमेटम पर सोमवार को पलटी मार दी है।
अमरीकी राष्ट्रपति ने हमले टालने का ऐलान करते हुए कहा है कि दोनों देश पिछले दो दिनों से बातचीत कर रहे हैं, इसलिए बिजली संयंत्रों पर हमले को टाला जा रहा है।
हाल ही में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने 48 घंटे के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमरीका उसके ऊर्जा ढांचों, खासकर बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा, लेकिन सोमवार देर शाम को 48 घंटे की अवधि पूरी होने से पहले ही ट्रंप ने उस अल्टीमेटम पर ब्रेक लगा दी है।
वहीं, ईरान ने दावा किया है कि ट्रंप के साथ उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है। ईरान ने ट्रंप के इन बयानों को तेल कीमतों को कम करने और सैन्य योजनाओं के लिए समय निकालने की कोशिश करार दिया।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि क्षेत्रीय देशों से तनाव कम करने के कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन ईरान का जवाब साफ है कि युद्ध शुरू करने वाला पक्ष अमरीका है, इसलिए सभी अपील पर वाशिंगटन को ही गौर करना चाहिए।
उधर, ईरानी मीडिया ने ट्रंप के ब्रेक के फैसले को अमरीका की हिचकिचाहट और पीछे हटने के रूप में पेश किया। अमरीकी राष्ट्रपति का ईरानी ठिकानों पर हमले टालने का फैसला ऐसे वक्त में हुआ, जब ईरान ने दो टूक चेतावनी दी थी कि अगर उसके तटीय क्षेत्रों या द्वीपों पर हमला किया गया, तो वह पूरी फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाकर सभी समुद्री मार्गों को बंद कर देगा।
ईरान की रक्षा परिषद ने कहा कि गैर-युद्धरत देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का एकमात्र तरीका ईरान के साथ समन्वय करना होगा।
परिषद ने कहा कि ईरान के तटों या द्वीपों पर किसी भी शत्रु हमले की स्थिति में फारस की खाड़ी और तटीय क्षेत्रों के सभी मार्गों तथा संचार लाइनों को विभिन्न प्रकार की नौसैनिक बारूदी सुरंगों से भर दिया जाएगा।
इसी बीच खबर यह भी है कि तुर्किये, मिस्र और पाकिस्तान ने अमरीका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। इन देशों के अधिकारियों ने अमरीका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से अलग-अलग बातचीत की है।
साथ ही, पिछले दो दिनों से ये देश अमरीका और ईरान के बीच मैसेज पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं, ताकि हालात शांत किए जा सकें और तनाव कम हो।

