हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश की बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तारीकरण को लेकर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लिया है।
सरकार ने विकास की राह में विस्थापित हो रहे उन परिवारों को राहत देने का बड़ा ऐलान किया है, जिन्होंने दशकों से सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जा कर रखा था और वहां अपने आशियाने या व्यवसाय चला रहे थे।
इस विशेष राहत पैकेज के तहत करीब 20 करोड़ रुपए की राशि इन परिवारों में वितरित की जाएगी, जो कि पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस निर्णय से लगभग 33 परिवार सीधे तौर पर लाभांवित होंगे। यरपोर्ट विस्तार की प्रक्रिया अब अपने अगले चरण में पहुंच गई है।
भूमि अधिग्रहण की शुरुआती औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब आरएंडआर (री-हैबिलिटेशन एंड रेसिट्लमेंट) पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इस पुनर्वास योजना के तहत प्रभावितों को वन टाइम सेटलमेंट या जमीन के बदले जमीन देने की सुविधा प्रदान की जा रही है।
इन्हें मिलेगा लाभ
ये वे लोग हैं जिन्होंने वर्षों से सरकारी जमीन पर निवास किया है या वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि संचालित की है। तकनीकी रूप से ये निर्माण अवैध श्रेणी में आते हैं, फिर भी प्रदेश सरकार ने उनके विस्थापन के दर्द को समझते हुए उन्हें निर्माण खर्च (स्ट्रक्चर कोष्ट) के मुआवजे का निर्णय लिया है।
उपनिदेशक के बोल
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार मानवीय पक्ष को देखते हुए बड़ा निर्णय कर रही है। कांगड़ा एयरपोर्ट के इस विस्तार से कांगड़ा घाटी और पूरे हिमाचल के आर्थिक परिदृश्य में बड़े बदलाव की उम्मीद है। हवाई यातायात में वृद्धि होने से न केवल पर्यटन को पंख लगेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विवाद सुलझते ही मिल जाएगी राशि
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन प्रभावितों ने अपने शपथ पत्र जमा करवा दिए हैं, उन्हें मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। वहीं, जिन मामलों में आपसी विवाद के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है, उन्हें भी विवाद सुलझते ही तुरंत राशि जारी कर दी जाएगी।

