पूजन के साथ महिलाओं ने तोडा शारदीय नवरात्रि का व्रत
इस शारदीय शारदीय नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि पर पूजा का विशेष महत्व है इस दिन कन्या पूजन का विशेष रूप से महत्व बताया गया है और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:30 से शुरू हो रहा है। आज बकलोल के आसपास के क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि के अष्टमी और नवमी नवरात्रों में सुबह घर की महिलाओं के द्वारा अष्टमी पूजन के साथ अपने-अपने व्रत को तोड़ा।
महिलाओं के द्वारा घर में पूजन करने के बाद अपने हाथों से हवा और पूरी चढ़कर मां का आशीर्वाद दिया और घर में छोटे-छोटे कंजको का पूजन किया गया। महिलाओं के द्वारा बच्चों को अपने पूजा स्थल पर बिठाकर उनके पांव को गंगाजल से धोकर, कन्याओं के माथे पर लाल तिलक लगाकर, सर पर लाल चुनरी उड़ा कर, हाथ में सभी बच्चों का सुरक्षा कवच के रूप में लाल मौली का धागा धारण किया गया और उनको अपने हाथों से बनाया हुआ हलवा पुरी, फल फलों के साथ अपने अपने अपने इच्छा के अनुसार बच्चों को पैसे और बर्तन भेंट किए गए।

सभी बच्चों की आरती उतारने के बाद मां के जय कारों के साथ सभी बच्चे खुशी खुशी जय कारे लगाते हुए अपने-अपने घरों की ओर लौट गए। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है यह पूजा सड़क को माता रानी के विशेष कृपा दिलाने वाली होती है।
मान्यता है कि नवरात्रि का पूजा करने पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दिन नौ कन्याओं को देवी के रूप में आमंत्रित करके उनके पैर धोने जाते और हवा पूरी चना का भोग अर्पित किया जाता है और फिर दान दक्षिण देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नवरात्रि के पूजन से सभी कासन का निवारण होता है और जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

