काँगड़ा – राजीव जस्वाल
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बलजीत सिंह पटियाल ने इस सेमिनार में पधारे विभिन्न सत्रों के अध्यक्ष, अतिथियों और सभी प्रतिभागियों का विधिवत रूप से औपचारिक स्वागत किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पधारे प्रो महावीर सिंह ने सेमिनार का मुख्य भाषण प्रस्तुत किया ।
डॉ महावीर ने कहा कि उन्होंने इसी महाविद्यालय से अपने करियर की शुरुआत की थी और यहां आकर उन्हें हमेशा ही बहुत अच्छा महसूस होता है । डीएवी महाविद्यालय कांगड़ा की बुलंदियों को देखकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हो रही है और वे विश्वविद्यालय परिसर में रहते हुए भी इस महाविद्यालय के लिए दिन-रात काम करने के लिए तत्पर रहते हैं । उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा ही डीएवी महाविद्यालय कांगड़ा अव्वल स्थान पर रहा है ।
प्रो महावीर ने ग्रीन एनर्जी की उपयोगिता के विषय में बताते हुए कहा कि यह केवल फिजिक्स अथवा केमिस्ट्री का विषय नहीं है अपितु संपूर्ण प्राणी जगत इसमें समाहित है । इस क्षेत्र में रोजगार के अद्भुत अवसर हैं । और वातावरण के लिए भी ग्रीन एनर्जी एक सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध साधन है । इसके बाद दिन के सत्र प्रारंभ हुए।
इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के पहले दिन दो सत्र हुए । प्रथम सत्र में अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पधारे प्रो महावीर सिंह ने की। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ पवन राणा, सीनियर साइंटिस्ट एच.एफ.आर.आई.शिमला, उपस्थित रहे।
उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया की खरपतवार नाशी केमिकल को प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरकता समाप्त हो रही है और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है इसलिए बेहतर है कि ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ा जाए जिससे पर्यावरण भी प्रदूषित न हो और स्वास्थ्य भी सही बना रहे ।
दिन के दूसरे सत्र में डॉ पवन राणा ने सत्र की अध्यक्षता की। इस सत्र में पहले वक्ता के रूप में केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से डॉ नीरज गुप्ता उपस्थित रहे । उन्होंने बताया कि नैनो तकनीक या नैनो प्रौद्योगिकी, व्यावहारिक विज्ञान के क्षेत्र में, १ से १०० नैनो (अर्थात 10−9 m) स्केल में प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और सम्बन्धित विज्ञान का समूह है।
द्वितीय सत्र में द्वितीय वक्त के रूप में डॉ बृजेश चौहान उपस्थित रहे । उन्होंने अपने वक्तव्य में विश्व में ग्रीन एनर्जी के मुख्य साधन सौर ऊर्जा के बारे में बताया उन्होंने कहा कि विश्व के बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट इस दिशा में कार्य कर रहे हैं ।
अन्त में पोस्ट सेशन का आयोजन किया गया। इस सेमिनार मे 335 प्रतिभागी प्रतिभागिता कर रहे हैं ।

