डाक्टर के कहने पर ही लें एंटीबायोटिक, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

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शिमला – नितिश पठानियां

स्वास्थ्य विभाग ने दवा के सेवन पर एडवाइजरी जारी की है। खासतौर पर एंटीबॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल बिना डाक्टर की सलाह के न करने की बात कही है। एंटीबॉयोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाए है।

इससे पहले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेस (डीजीएचएस) ने भी एंटीबॉयोटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए घातक होने की बात कही थी। डीजीएचएस के अनुसार एंटीबॉयोटिक दवाओं से खून में ड्रग रेजिस्टेंट बढ़ता है। जो बाद में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंट (एमएमआर) का रूप ले लेता है।

एमएमआर पूरे विश्व में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। डीजीएचएस ने फार्मासिस्टों को सलाह दी है कि बिना डाक्टर के लिखे किसी भी तरह की एंटीबॉयोटिक दवा मरीजों को इस्तेमाल के लिए न दें। अब डीजीएचएस की इस एडवाइजरी पर स्वास्थ्य विभाग भी सजग हो गया है।

विभाग ने प्रदेश भर के फार्मासिस्टों को डीजीएचएस की गाइडलाइन समझने और एंटीबॉयोटिक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले रोगों से बचने के लिए निर्देश जारी किए है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. गोपाल बैरी ने बताया कि दवाओं के इस्तेमाल से शरीर में कई तरह की बीमारियां लग सकती है।

डीजीएचएस ने एंटीबॉयोटिक को लेकर विश्व भर में सामने आए मौत के आंकड़ों को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। प्रदेश में सभी फार्मासिस्टों को यह बात माननी चाहिए। लगातार एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल से शरीर में मौजूद जीवाणु इसके आदि हो जाते है और दवाओं का असर कम होने के बाद खत्म हो जाता है। इसके साथ एमएमआर की समस्या भी महसूस होने लगती है।

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