पीएचडी-नेट क्वालिफाई करने के बाद भी सडक़ किनारे बेचने पड़ रहे गमले, जाने बैजनाथ के डा. विजय की कहानी

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हिमखबर डेस्क

हर होशियार व होनहार विद्यार्थी का सपना होता है कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक अच्छे पद पर सेवा कर सके, लेकिन कभी कभी उच्च शिक्षा लेने के बाद भी समय का फेर ऐसा आता है कि पीएचडी डिग्री धारक को भी सडक़ किनारे बैठकर सामान बेचना पड़ सकता है।

जिला कांगड़ा उपमंडल बैजनाथ की पंचायत सकड़ी के डा. विजय विद्यार्थी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। पीएचडी करने के बाद भी डा. विद्यार्थी की किस्मत ने ऐसा रंग बदला कि उन्हें अब सडक़ किनारे बैठकर गमले बेचने पड़ रहे हैं। बैजनाथ के समीप पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे के अवाही नाग मोड़ पर डा विद्यार्थी गमले, टप और बाल्टियां इत्यादि बेच रहे हैं।

उन्हें देखकर लोगों को लगता है कि किसी आम व्यक्ति ने अपनी दुकान सजाई हुई है, लेकिन जब लोगों को उनकी शिक्षा के बारे में पता चलता है कि सब हैरान हो जाते हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से हिंदी में प्रथम श्रेणी में एमए और एमफि ल की डिग्री ग्रहण करने के बाद डा. विजय विद्यार्थी ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। विजय विद्यार्थी यूजीसी नेट भी क्वालिफाइड हैं।

तीन किताबें लिख चुके हैं और 20 से ज्यादा रिसर्च पेपर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में प्रस्तुत कर चुके हैं। साथ ही इनके अनेक शोधपत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। डा. विद्यार्थी यूजीसी की पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप ले चुके हैं। साथ ही कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र में लगातार छह वर्षों तक एमए की कक्षाओं को पढ़ाते रहे हैं।

कोरोना आने के बाद अचानक घर आना पड़ा और उसके बाद इनकी नौकरी चली गई, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्षों से लड़ते रहे और बाद में उन्हें थक हार कर सडक़ पर अपनी दुकानदारी सजानी पड़ी है।

डा. विजय विद्यार्थी का कहना है कि काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। आदमी की सोच ही आदमी को महान बनाती है और जो काम आपको रोटी देता है, उस काम को दिल लगाकर करना चाहिए।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

रोजगार की तलाश में परेशान युवा पीढ़ी के लिए विजय किसी प्रेरणा स्रोत से कम नहीं हैं। डॉ विजय विद्यार्थी शिक्षा के आखरी शिखर तक डिग्रियां लेने के बावजूद सडक़ किनारे सामान बेचने वाले इस व्यक्ति का कहना है कि आदमी को अपनी ईमानदारी और काबिलियत पर हमेशा भरोसा रखना चाहिए।

मेहनत एक न एक दिन जरूर रंग लाती है। गुस्से और तनाव में युवा पीढ़ी कोई भी गलत कदम न उठाए अपितु धैर्य और हिम्मत से अपने पैरों पर खड़े होने का कोई रास्ता अपना कर अपना अलग से इतिहास लिखें।

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