शास्त्री के पदों की काउंसलिंग पर बवाल, आत्मदाह व डिग्री जलाने की चेतावनी
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर मुख्यालय नाहन में सोमवार को शास्त्री बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए है। आरोप है कि काउंसलिंग में शास्त्री के पद पर योग्यता रखने वालों को ही अपात्र किया जा रहा है। शास्त्रियों को यह कहकर बाहर निकाल दिया गया कि आपके पास बीएड की डिग्री नहीं है, वो बीएड डिग्री के बगैर काउंसलिंग में भाग नहीं ले सकते।
शास्त्री भर्ती में शास्त्रियों को ही नहीं बुलाया जा रहा है। काउंसलिंग में बैच भी बीएड के ही लिए जा रहे हैं जबकि पोस्ट शास्त्री सीएंडवी की है। जिसमें शास्त्री, पीटीआई और ड्राइंग टीचर आते हैं।
अभियर्थियों ने बताया कि सरकार ने नियम बदलकर 17 और 18 नवंबर को शास्त्रियों की काउंसलिंग के लिए बुलाया था। जिसमें शास्त्रियों ने बहुत विरोध किया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए 18 तारीख की काउंसलिंग को रोक लगा दी। कहा कि शास्त्री भर्ती समस्या को ध्यान में रखते हुए भर्ती को रोका गया।
बाद में जब भी काउंसलिंग होगी तो शास्त्रियों की समस्या के नियमों को बदला जाएगा। जैसे ही शीतकालीन सत्र समाप्त हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दोबारा वही पुराने नियमों से शास्त्री की भर्ती करने का आदेश जारी कर दिया।
शास्त्री संघ ने बताया कि सरकार की यह मंशा समझ में नहीं आ रही है कि भर्ती क्यों रोकी थी, दोबारा वही पुराने नियमों से अगर भर्ती करनी थी। तो हमारे साथ इस तरह का छल कपट क्यों किया जा रहा है। शास्त्रियों ने सरकार के द्वारा दोगली नीति अपनाने और शास्त्री वर्ग को आहत करने का विरोध किया है।
आरोप है कि एकाएक नियम बदलकर बीएड, बीए, एमए वालों को भी शामिल कर दिया। उन्होंने कहा कि 2012 में आरएमपी रूल बना था कि शास्त्री की डिग्री 50% अंकों के साथ टेट पास अनिवार्य अभ्यर्थी को ही शास्त्री की पोस्ट पर नियुक्त किया जाएगा। इसी तर्ज पर 2023 तक नियुक्ति होती रही। परंतु अब सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया, जबकि शास्त्री का बैच अभी तक 2010 से पहले का ही चला हुआ है।
उन्होंने कहा कि अगर शास्त्री की पोस्ट पर बीएड, बीए ,एमए वालों को सम्मिलित कर दिया जाएगा तो शास्त्री कहां जाएंगे। कहा कि सरकार बेरोजगारी युवाओं को गुमराह कर रही है, अगर ऐसे ही नियम बदलकर बेरोजगारी ही फैलानी थी। तो संस्कृत महाविद्यालय क्यों खोले गए है,और हमारे 5 साल क्यों बर्बाद करवाएं।
शास्त्री वर्ग ने कहा कि अगर सरकार ने हमारी पीड़ा को नहीं समझा तो आने वाले भविष्य में उग्र आंदोलन करने पर विवश हो जाएंगे। जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। साथ में हम मुख्यमंत्री के समक्ष डिग्रियों को जला देंगे। संघ ने कहा कि अगर सरकार को हमारी पीड़ा का अंदाजा नहीं हुआ तो हम आत्मदाह तक करने के लिए तैयार हैं।

