राज्यों में उप मुख्य मंत्रीयों की नियुक्तियां सत्ता की भूख और दबाव की राजनीति का उदाहरण-साधू राम राणा

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सत्ता की भूख में दबाव की राजनीति को रोकने के लिए बिना घोषित उम्मीदवारों के होने चाहिए चुनाव, राज्यों में उप मुख्य मंत्रीयों की नियुक्तियों सत्ता की भूख और दबाव की राजनीति का हैं उदाहरण -साधू राम राणा। 

डोल भटहेड़ – ऐके शर्मा 

पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने राज्यों में उप मुख्यमंत्रीयों की नियुक्तियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यों में उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति सत्ता के भूखों के दबाव और विद्रोह को राजनीति में रोकने के लिए मजबूरी में डाली गई प्रथा लोकतंत्र को मजबूत करने के बजाय कमजोर करने के साथ अर्थव्यवस्था पर भी बोझ बनती जा रही है।

जबकि प्रशासनिक एवं जनहितकारी योजनाएं लागू करने में उपमुख्यमंत्री का कोई महत्व नहीं है। सिर्फ और सिर्फ सत्ता के भूखों का राजनीति दबाव को रोकने के लिए ही हर राजनीति दल को सत्ता चलाने केलिए उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति हर राज्य में एक नहीं बल्कि दो-दो नियुक्त करने पड़ रहे हैं।

अतः राजनीति दबाव से ऊपर उठकर यदि राजनीति दलों को सत्ता चलानी है तो चुनावों में कोई भी उम्मीदवार किसी भी विधानसभा में घोषित न किए जाएं बल्कि राजनीति दलों के चुनाव चिन्ह पर मतदान करवाया जाए और मतों के आधार पर जो दल जिस विधानसभा से जीत जाए वहीं राजनीति दल अपना मनपसंदीदा उमीदवार घोषित कर दे।

अतः ऐसा करने से फिर कभी भी सत्ता के भूखों को मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री बनने या भीतरघात और बाहरी बगावत को लेकर अपने दल पर दबाव बनाने का मौका नहीं मिलेगा और लोकतंत्र में बिना दबाव की राजनीति का नया युग देखने को मिलेगा।

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