काठगढ़ महादेव मंदिर में गंगाधर शास्त्री महाराज ने मधुर प्रवचनों से सैंकड़ो श्रोताओं को किया निहाल

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व्यूरो रिपोर्ट

स्वयं भू प्रकट आद शिवलिंग काठगढ़ महादेव, में चल रहे श्रवण मास महोत्सव में आज त्याग मूर्ति श्री द्वारका नाथ शास्त्री जी के सुपुत्र महाराज श्री गंगाधर शास्त्री (जम्मू वाले) जी ने आज अपने मधुर प्रवचनों में सैंकड़ो श्रोताओं को निहाल किया।

जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ सबसे बड़े कथावाचक है और बड़े श्रोता भी है। भोलेनाथ जी ने हिमालया की दो कन्याओं से विवाह किया जिसमें एक माँ पार्वती व दूसरी माँ गंगा। उन्होंने कहा कि शिव का अर्थ ही कल्याण करने वाला है। और उनके माथे पर अर्द चन्द्रमा अंकित है।

जब देव व असुरो द्वारा समुद्र मंथन किया गया और उसमें जो 14 रत्तनो के साथ साथ विष भी निकला जो कि शंकर भगवान जी के हिस्से में आया जिसको शंकर जी ने पी लिया और अपने कण्ठ में रोक लिया जिससे त्रेता युग की सरंचना हुई।

अगर यह विष उस समय धरती पर पड़ जाता तो युगों युगों तक जीवो की उत्पत्ति नही हो सकती थी और भोलेनाथ जी ने इस विष को हृदय में इसलिए नही उतारा क्योंकि शिव जी के हृदय में श्री नारायण जी स्वयं वास करते है। इसलिए ही भोलेशंकर जी को विषहारी भी कहा जाता है।

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