सहायक प्रोफेसर बनी पूनम, 5 बुजुर्गों सहित 7 छोटे बहन भाइयों की उठाएगी जिम्मेदारी.
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
यह सफलता की दास्तां 28 साल की पूनम शर्मा की है। पूनम उस समय छठी कक्षा की छात्रा थी, जब सिर से पिता का साया उठ गया था।
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पॉलिटिकल साइंस में सहायक प्रोफेसर की परीक्षा उत्तीर्ण करना पूनम के लिए डु और डाई जैसी स्थिति जैसा था। 2018 के बाद राजनीतिक विज्ञान में सहायक प्रोफेसर के पद भरे जा रहे थे।
आठ बहन-भाइयों में सबसे बड़ी पूनम शर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। घर में 5 बुजुर्गों व मां के अलावा पूनम के 7 छोटे बहन-भाई भी है। संगड़ाह उपमंडल के सांगना सताहन पंचायत से ताल्लुक रखने वाली पूनम ने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मी पूनम ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हासिल की। इसके बाद संगड़ाह डिग्री कॉलेज से स्नातक की शिक्षा हासिल की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्याल से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद सेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर की। पूनम के परिवार में 70 से 80 साल के तीन पुरुष बुजुर्ग हैं। वहीं 60 से 65 साल की 3 बुजुर्ग महिलाएं हैं। वह रिश्ते में पूनम के दादा दादी है।
सफलता का श्रेय पूनम ने हिमाचल प्रदेश के सबसे युवा डीएसपी होने का गौरव हासिल करने वाले एचपीएस अधिकारी अनिल शर्मा के अलावा मोहन शर्मा को दिया है। पूनम का कहना था कि चाचा रामलाल शर्मा ने भी हमेशा हिम्मत बढ़ाई। साथ ही हौसला दिया।
बातचीत के दौरान पूनम ने माना कि सबसे बड़ी होने के नाते बुजुर्गों की जिम्मेदारी भी है। पूनम ने बताया कि परिवार का गुजर-बसर जमींदारा से ही चलता है। परिवार में उससे पहले कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है।

