हिमाचल में कैसे फेल हुआ स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का प्रयोग? रामसुभग ने छोड़ा ऊर्जा का कार्यभार

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शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल की ब्यूरोक्रेसी में पहली बार हुआ स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का प्रयोग एक महीना ही चल पाया है। राज्य सरकार ने चीफ सेक्रेटरी के बाद स्पेशल चीफ सेक्रेटरी बनाए गए सीनियर मोस्ट आईएएस अधिकारी रामसुभग सिंह को दिया ये पदनाम वापस ले लिया है।

मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की ओर से गुरुवार को इस बारे में अधिसूचना जारी हो गई। हैरानी की बात यह है कि खुद रामसुभग सिंह ने ही इस चार्ज को छोड़ने का आग्रह किया था। हिमाचल की अफसरशाही में 1987 बैच के रामसुभग सिंह सबसे वरिष्ठ आईएएस अफसर हैं।

पूर्व जयराम सरकार के समय रामसुभग सिंह की जगह जब 1988 बैच के आरडी धीमान को मुख्य सचिव बनाया गया था, तो रामसुभग सिंह समेत कुल 3 सीनियर अफसरों को प्रधान सलाहकार बनाकर किनारे कर दिया गया था।

सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनने के बाद नए मुख्यमंत्री ने तीनों को काम दिया। 31 दिसंबर को आरडी धीमान के रिटायर होने के बाद रामसुभग सिंह के लिए स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का नया पदनाम क्रिएट किया गया और इन्हें ऊर्जा विभाग का जिम्मा दिया गया। बिजली बोर्ड के चेयरमैन और प्रधान सलाहकार मुख्यमंत्री का कार्यभार अलग से इनके पास था।
इनके साथ ही संजय गुप्ता और निशा सिंह को भी नई सरकार ने काम दे दिया है, लेकिन इन तीनों में से स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का प्रयोग सिर्फ रामसुभग सिंह के लिए हुआ था।

ऊर्जा विभाग का जिम्मा मिलने के बाद वह भारत सरकार की एक बैठक के लिए भी गए थे। माना जा रहा है कि वहां कई बैचमेट मिलने के बाद इन्हें आईएएस की सीनियोरिटी को लेकर कुछ एहसास हुआ। यदि इस पद पर रहते तो अपने से जूनियर चीफ सेक्रेटरी के साथ कैबिनेट में भी जाना पड़ता।

इन सारी चीजों को देखते हुए इन्होंने स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का चार्ज छोड़ने का आग्रह सरकार से किया था, जिसे मान लिया गया है। अब रामसुभग सिंह बिजली बोर्ड के चेयरमैन होंगे और मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार भी रहेंगे।

वह दुग्ध उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्र में सीएम को एडवाइज करेंगे। राज्य सरकार ने ऊर्जा सचिव के तौर पर पहले ही राजीव शर्मा के आर्डर कर दिए थे।

राकेश कंवर पशुपालन और मत्स्य भी देखेंगे

राज्य सरकार ने 2007 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश कंवर को पशुपालन और मत्स्य विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया है। इससे पहले यह कृषि और भाषा विभाग के सचिव थे।

पशुपालन सचिव डॉ अजय शर्मा के हाल ही में रिटायर होने के बाद ये पद खाली थे और इन्हें अब राकेश कंवर को दिया गया है। नई सरकार किसानों से बाजार से ज्यादा रेट पर दूध खरीदने की गारंटी दे चुकी है और इस स्कीम को अब राकेश कंवर को जमीन पर उतारना होगा।

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