
शिमला – नितिश पठानियां
आईजीएमसी शिमला में पहली बार रोगी का ब्रेन टयूमर नाक के रास्ते से निकाला गया है। 64 साल के रोगी के दिमाग से ईएनटी के सहयोग से न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने यह काम करके दिखाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक प्रदेश के अन्य मरीजों के लिए भी कारगार साबित होगी, क्योंकि पहले तरीके के ऑपरेशन में मरीज का पूरा सिर खोलना पड़ता था, लेकिन अब ब्रेन टयूमर को नाक के रास्ते से ही निकाल लिया जाएगा।
64 साल का मरीज मंडी जिले से आया था और उसे सिरदर्द था और देखने में भी दिक्कत थी, जिसे टयूमर था। दो हारमोन भी डेफिशेंट थे।
एंडोस्कोपिक विधि के द्वारा नाक के माध्यम स्कल बेसिज में जाकर साइनेसिज बेसिस तक ईएनटी द्वारा पहुंचाया गया और सर्जरी विभाग द्वारा इसका ऑपरेशन किया गया। इस मरीज को पिटयूटरी ग्लैंड का टयूमर था। चिकित्सकों का कहना है कि मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे छुटटी दे दी गई है।
इस मरीज के आपरेशन में न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा.बिप्लव सिंह, डा.दिग्विजय सिंह ठाकुर, डा.विक्रम सिंह, ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डा.जगदीप, एनेस्थिसिया विभाग के सहायक प्रोफेसर डा.कुणाल कुमार, डा.अतुल, डा.राहुल, डा.दीक्षा का योगदान रहा।
ब्रेकियल प्लेक्सस के मरीज का हुआ सफल ऑपरेशन
दूसरे 23 वर्षीय मरीज का आपरेशन न्यूरो सर्जरी ने प्लास्टिक सर्जरी विभाग के साथ मिलकर किया है, जिसमें मरीज को ब्रेकियल प्लेक्सस बीमारी थी, जिसके लिए नर्व ट्रांसफर आपरेशन किया गया।
ब्रेकियल प्लेक्सस बीमारी में मरीज का एक्सीडेंट के बाद बाजू फ्रेक्चर होने के कारण नसों का गुच्छा बन गया था। इस आपरेशन में माइक्रोस्कोप की मदद से स्वस्थ नस को कमजोर नस के साथ जोड़ा गया। यह मरीज भी अब डिस्चार्ज हो चुका है और दोनों मरीज अब स्वस्थ जीवन जी रहे है।
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. दिग्विजय सिंह ठाकुर, सहायक प्रोफेसर डा. बिप्लव सिंह, डा. विक्रम सिंह, प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. तुषार पटियाल, एनेस्थिसिया विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. कुणाल कुमार, डा. डीजी नेगी, डा. अतुल, डा. नेहा, डा. वृंदा का योगदान रहा है।
