हिमाचल चुनावः भाजपा के सुरेश भारद्वाज सहित 4 प्रत्याशी क्यों खुद को नहीं डाल पाएंगे वोट?

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व्यूरो रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कई प्रत्याशी स्वयं को वोट नहीं दे पाएंगे. सियासी समीकरण और रणनीति कुछ ऐसी बनी हैं कि ये प्रत्याशी अब खुद को भी वोट नहीं दे पाएंगे.

दरअसल, कांगड़ा के नूरपुर से ताल्लुक रखने वाले और फतेहपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशी राकेश पठानिया इस बार ख़ुद को वोट नहीं दे पाएंगे.

ठीक इसी तरह, कांगड़ा के जवालामुखी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रविन्द्र रवि भी ख़ुद को वोट कास्ट नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनका वोट देहरा में बना हुआ है और चुनाव क्षेत्र अब बदल चुका है.,

ऐसे ही एक और जयराम सरकार के मंत्री हैं, जो ख़ुद को वोट नहीं दे पाएंगे. वो कोई और नहीं, बल्कि कसुम्पटी से भाजपा प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज हैं.

दरअसल, भारद्वाज का शिमला शहर में वोट है. जबकि चुनाव किसी और विधानसभा से लड़ रहे हैं. प्रदेश में कुछ और नेताओं के सामने भी ख़ुद के लिये वोट न डाल पाने की समस्या है.

शिमला ग्रामीण से कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह का रामपुर में वोट है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी बेटे विक्रमादित्य को वोट नहीं डाल पाएंगी. उनका नाम भी रामपुर की मतदाता सूची में है. हिमाचल के इन सभी नेताओं ने ताल तो ठोक दी है, लेकिन स्वयं को वोट नहीं कर पाएंगे.

सुरेश शिमला शहरी से ही लड़े हैं पहले चुनाव

भाजपा ने शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज का विधानसभा क्षेत्र बदला है. उन्हें शिमला शहर से कसुम्पटी भेजा है, इसलिए पहली बार अपने आप को वोट नहीं डाल पाएंगे. उन्होंने इससे पहले सभी चुनाव शिमला शहर से लड़े हैं.

राकेश पठानिया पहली बार नूरपुर से बाहर

वन मंत्री राकेश पठानिया का चुनावी क्षेत्र भी भाजपा ने बदल दिया है. वह पहली बार नूरपुर से बाहर चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, पार्टी ने वरिष्ठ नेता रमेश धवाला का टिकट भी बदला है, उन्हें ज्वालामुखी की बजाय देहरा से चुनाव मैदान में उतारा है, उनका वोट पहले से ही इस विधानसभा क्षेत्र में हैं। रविंद्र रवि का चुनाव क्षेत्र भी देहरा से बदलकर ज्वालामुखी कर दिया है.

विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह ने कभी खुद को वोट नहीं डाला

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव में खुद को कभी वोट नहीं डाला. वीरभद्र सिंह का वोट रामपुर में था, लेकिन उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव रोहडू और उसके बाद शिमला ग्रामीण से लड़ा. फिर अर्की और अन्य क्षेत्रों से मतदान किया.

वह हर बार मतदान के लिए वह रामपुर पहुंचते थे. हालांकि, लोकसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी के तौर पर वह स्वयं को वोट जरूर देते थे. क्योंकि रामपुर मंडी संसदीय क्षेत्र में पड़ता है.

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