हिमाचल प्रदेशः विधवा बहू को 2 साल की मासूम बेटी के साथ घर से निकाला, ससुर-जेठ ने दुकान पर किया कब्जा, 3 महीने पहले हुई थी पति की मौत

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कांगड़ा में विधवा को बच्ची सहित घर से निकाला गया, ससुर और जेठ ने दुकान पर कब्जा किया, वीडियो वायरल, पुलिस ने तीन आरोपियों पर केस दर्ज किया। 

देहरा – शिव गुलेरिया

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा कस्बे के हनुमान चौक से एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक विधवा महिला को उसकी 2 साल की मासूम बच्ची सहित उसके ससुर और जेठ ने जबरन दुकान से बाहर निकाल दिया। गौरतलब है कि महिला के पति की तीन महीने पहले ही मौत हुई थी।

यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मृतक हरिकृष्ण की पत्नी, पूर्णिमा शर्मा को उसका जेठ, जो पेशे से वकील है, और बुजुर्ग ससुर मिलकर दुकान से बाहर धकेल रहे हैं और ताले तोड़कर दुकान पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। यह घटना देहरा शहर के सबसे व्यस्त हनुमान चौक की है, जो कांग्रेस विधायक कमलेश ठाकुर की गृह विधानसभा क्षेत्र में आता है। वायरल वीडियो के चलते स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

पुलिस ने लिया संज्ञान, दर्ज की शिकायत

वीडियो वायरल होने के बाद जिला पुलिस देहरा ने त्वरित संज्ञान लिया। शिकायतकर्ता पूर्णिमा शर्मा, निवासी वार्ड नंबर 03 अमरपुरी, देहरा ने पुलिस थाना देहरा में तीन आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। इसमें ससुर प्रियवत शर्मा (75), जेठ हरीओम शर्मा (46) और जेठानी वंदना शर्मा (40)  को आरोपी बनाया गया है।

उधर, पुलिस जांच में यह मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा पाया गया, जिसमें उक्त आरोपियों के खिलाफ धारा 126/169 बी.एन.एस. के तहत कार्रवाई करते हुए चालान तैयार किया गया है। यह केस अदालत जनाब SDM देहरा को भेजा जा रहा है।

स्थानीय लोगों की मांग – तुरंत मिले न्याय

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि महिला और बाल अधिकारों का गंभीर हनन है। लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और पीड़िता को न्याय व सुरक्षा प्रदान की जाए।

अब लोगों की निगाहें विधायक कमलेश ठाकुर और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस कृत्य पर क्या ठोस कदम उठाते हैं। इस घटना ने समाज को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विधवाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आज भी कितनी सजगता की आवश्यकता है।

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