हिक्किम गांव में दुनिया का ऐसा डाकघर जहां से हर कोई भेजना चाहता है चिट्ठियां

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व्यूरो रिपोर्ट

स्मार्टफोन की दुनिया में आखिर चिट्ठियां कौन भेजता है लेकिन स्पीति के हिक्किम गांव में स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे डाकघर से आज भी प्रति दिन सैंकड़ों चिठियां भेजी जा रही है। यह डाकघर पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है।

स्पीती आने वाले पर्यटक को जैसे ही पता चलता है कि यह डाकघर दुनिया में सबसे उंचा है तो वो यहां से खुद को ही पत्र भेजने में जुट जाते हैं।

इन दिनों सैंकड़ो पर्यटक हिक्किम के साथ साथ लांगचा-एक, लांगचा-दो और कॉमिक गांवों में घूमने आ रहे हैं। यह पर्यटक डाकघर से पत्र लिखकर अपने को ही भेज रहे हैं। जिससे डाकघर में कई बार टिकट की कमी पड़ जाती है।

यह डाकघर जल्द ही नए रूप में नजर आएगा। हिक्किम के ग्रामीण दोरजे व पलजोर ने बताया कि देश विदेश के पर्यटक दुनिया के इस सबसे ऊंचे डाकघर से एक दूसरे के साथ साथ स्वयं को भी चिट्ठी भेज रहे हैं।

उन्होंने बताया कि देश भर के सैलानियो के साथ साथ विदेश के सैलानी भी इस लेटर बाक्स में अपना अड्रेस लिखकर पोस्ट कार्ड भेजते हैं। दिलचस्प यह है कि उनके घर पहुंचने से पहले ही उनका पोस्ट कार्ड डाक द्वारा घर पहुंच जाता है।

हिमाचल प्रदेश के स्पीति में हिक्किम गांव में स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा डाकघर 14567 फीट की ऊंचाई पर बना है। पहले यह सड़क से नीचे की ओर बनाया था लेकिन अब डाक विभाग ने सड़क किनारे दुनिया का सबसे खूबसूरत लेटर बाक्स बनाया है। यह लेटर बोक्स दूर से ही दिखाई देता है।

हिक्किम का यह डाकघर 1983 से दूर-दराज के दुर्गम गांवों तक चिट्ठियां पहुंचा रहा है। हिक्किम के आसपास के गांवों में संचार का एकमात्र साधन चिट्ठियां ही थी लेकिन अब नेटवर्क की सुविधा भी मिल गई है। इस उप डाकघर के जिम्मे हिक्किम के अलावा लांगचा-एक, लांगचा-दो और कामिक गांवों में चिट्ठियां पहुंचाना है।

गौर हो कि हिक्किम गांव सिर्फ डाकघर के लिए ही नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले विलुप्त होने वाले वन्य प्राणियों के लिए भी प्रसिद्ध है।

हिक्किम पोस्ट आफ‍िस के इंचार्ज रिचेन छेरिंग ने बताया कि हिक्किम में बने लेटर बोक्स से देशी विदेशी सैलानी अपने पते पर पोस्ट कार्ड भेज रहे हैं।

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