हर दिन 50 किलो गुलदाउदी पैदा कर रहे बलवीर सैणी, 300 रुपए किलो बिक रहा फूल

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धर्मशाला के पटौला गांव में कर रहे खेती; साढ़े तीन माह महीने में तैयार हुई फसल, 300 रुपए किलो बिक रहा फूल

हिमखबर डेस्क

यूं तो क्राइसेंथीमम फूल की मांग दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून, पंजाब व जम्मू में खूब होती है, लेकिन अब यह हिमाचल में भी खूब उग रहा है। हिमाचल के प्रगतिशील किसान बलवीर सैणी ने इस फूल को अपनी फार्म में सफलतापूर्वक तैयार किया है।

धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के तहत पटौला गांव में बलवीर सैणी पिछले दस साल से खेती और बागबानी पर शोध कर रहे हैं। इस बार सैणी ने 6 कनाल जमीन में क्राइसेंथीमम फू ल उगाया है। यह गुलदाउदी प्रजाति का फूल है।

यह फूल 100 से 120 दिन में तैयार होता है। बाजार में 300 रुपए तक बिकने से इस फूल में आगामी समय में कांगड़ा व हिमाचल के बागबान अच्छी कमाई कर सकते हैं। जरा सी चूक सारी फसल को खराब कर देती है। अभी सैणी रोजाना 40 से 50 किलो फूल निकाल रहे हैं।

उनके पास दूर-दूर से फार्मर्ज इस फूल को उगाने के गुर सीखने आ रहे हैं। सैणी ने किसानों से आग्रह किया है कि वे इस फूल को उगाकर अच्छी कमाई करें। दूसरी ओर सैणी की फार्म गर्मी में लगने वाली सब्जियों टमाटर, घीया, बैंगन, करेला, मिर्च, शिमला मिर्च आदि की पनीरी लेने दूर-दूर से किसान आ रहे हैं।

देखने में गेंदे जैसा

सैणी ने बताया कि यह फूल भी गेंदे के फूल की तरह होता है। अभी तक तो इस कांगड़ा और आसपास के बाजारों में इन फूलों की मांग है। अगर ज्यादा पैदावार हो तो पठानकोट तक यहां से फूल भेजते हैं। अपने संदेश में सैणी कहते हैं कि किसानों को अन्य फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती भी करनी चाहिए। प्रदेश में अकसर सर्दियों में उगने वाले गुलदाउदी फूल का उत्पादन अब पूरे साल किया जा सकता है।

दोमट मिट्टी की जरूरत

सैणी ने बताया कि गुलदाउदी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी गई हैण् साथ ही मिट्टी का पीएच मान 5ण्5 से 6ण्5 के बीच बेहतर होता हैए अगर आप गुलदाउदी की खेती करने का प्लान बना रहे हैंए तो सबसे पहले खेत की जुताई करने के बाद मिट्टी को भुरभुरा बना लेंए फिर पाटा चलाकर खेत को समतल करेंए यदि आप चाहें तो खाद के रूप में गोबर का भी उपयोग कर सकते हैंण् फिर क्यारी बनाकर आप गुलदाउदी के पौधों को रोप सकते हैं। इसकी रोपाई के लिए फरवरी से मार्च का महीना बेहतर माना गया हैण् लेकिन पॉली हाउस के अंदर आप किसी भी मौसम में इसकी खेती कर सकते हैं।

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