फोरलेन निर्माण की कछुआ चाल, धूल और गड्ढों से जनता बेहाल

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हिमखबर डेस्क 

पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना का निर्माण स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए सुविधा के बजाय दुविधा बन गया है। ठानपुरी से परौर तक के पैच में निर्माण की रफ्तार काफी धीमी है।

इससे उबड़-खाबड़ रास्तों और धूल के गुबार ने वाहन चालकों का जीना मुहाल कर दिया है। करीब 816 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार लोगों के लिए परेशानी बना हुई है।

परियोजना के तहत 16.275 किलोमीटर के इस हिस्से में चार अंडरपास और पांच पुल बनने प्रस्तावित हैं। मगर हकीकत यह है कि सुनेहड़ के पास बनेर खड्ड पर बनने वाले पुल का काम अभी भी अधर में है।

पिलरों का निर्माण तक पूरा नहीं हो पाया है, जो परियोजना की कछुआ चाल को बयां कर रहा है। खराब सड़क के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हर पल बना रहता है।

स्थानीय निवासी अमित कुमार, सन्नी, तरुण, अश्वनी और कपिल सहित अन्य लोगों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

निर्माण कंपनी द्वारा उड़ती धूल को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम न किए गए हैं। इससे सफर के दौरान सांस लेना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।

राहुल राय, परियोजना प्रबंधक के बोल 

ठानपुरी से परौर तक इस सड़क के निर्माण के लिए वर्ष 2026 के अंत तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। तय समय के भीतर कार्य पूरा कर लोगों को बेहतर फोरलेन सुविधा उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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