
नूरपुर, देवांश राजपूत
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय महाजन ने आरोप लगाया है कि नूरपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर हैं। उन्होंने कहा कि इसका जीता जागता उदाहरण जयराम सरकार द्वारा घोषित 200 बिस्तर नूरपुर का सिविल अस्पताल है, यहां विशेषज्ञों की कमी होने के कारण स्थानीय जनता पंजाब व आस पास के निजी अस्पतालों में भारी भरकम खर्च कर उपचार करवाने के लिए मजबूर है।
महाजन ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ने अपने पहले नूरपुर प्रवास में नूरपुर अस्पताल को 200 बिस्तर का दर्जा देने व ब्लड बैंक स्वीकृत करने की घोषणा की थी जबकि सरकार का चौथा साल चल रहा है तथा वह घोषणा सिर्फ कागजों में सीमित है।
नूरपुर का उपमंडलीय अस्पताल पर पांच विधानसभा क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आते हैं जबकि अस्पताल की हालत यह है कि न तो यहां त्वचा रोग, न आंख रोग, न नियमित रेडियोलॉजिस्ट और न ही स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध है।उन्होंने कहा कि नूरपुर अस्पताल की हालत यह है कि अस्पताल में कार्य कर रहे चिकित्सक व स्टाफ पर काम का बहुत दबाव है।
स्थानीय विधायक एवं मंत्री राकेश पठानिया टांडा मेडिकल कॉलेज की दशा पर तो सरकार के समक्ष मुद्दा उठाते हैं, लेकिन नूरपुर अस्पताल की दुर्दशा पर चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में गर्भवती महिलाओं को उक्त अस्पताल शुरू न होने व स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण पंजाब व क्षेत्र के निजी अस्पतालों व कई किलोमीटर दूर टांडा मेडिकल कालेज जाना पड़ रहा है।
निजी अस्पतालों में एक तो पैसे की बर्बादी हो रही है ऊपर से कोरोना से संक्रमण का खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार नूरपुर से भेदभाव कर रही है जिसका खामियाजा अगले विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
