पगार को तरसे एचआरटीसी, एचपीटीडीसी कर्मचारी, सब खुलने के बाद भी सुचारू नहीं हुई व्यवस्था

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शिमला, जसपाल ठाकुर

हिमाचल सरकार के दो उपक्रमों के हजारों कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं। आलम यह है कि लॉकडाउन के बाद सब कुछ खुले काफी समय हो चुका है, मगर इन सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों का वेतन अभी भी समय पर नहीं मिल रहा है। इसमें पथ परिवहन निगम और पर्यटन विकास निगम हैं, जिनके हजारों कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हुए हैं।

हर महीने समय पर इनका वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस महीने भी 19 तारीख हो चुके हैं, परंतु अभी तक तन वाह नहीं मिली जिससे कर्मचारियों की हालत खराब हो चुकी है। महीने में वेतन इन्हें 25 से 30 तारीख के बीच में मिल पा रहा है और कई बार तो पहले मिला भी नहीं। ऐसे में घर का खर्च चलाना इन कर्मचारियों के लिए बेहद मुश्किल हो चुका है। लॉकडाउन के समय में परिवहन निगम की बसों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, जो अब चला तो दी गई हैं, मगर पूरी क्षमता के साथ एचआरटीसी नहीं चल रही है।

इतना ही नहीं, उसकी कमाई उस तरह की अभी तक नहीं हुई है, जिसे काफी ज्यादा नुकसान हो चुका है। ऐसे में कर्मचारियों का वेतन उससे नहीं निकल पा रहा। वहीं पर्यटन विकास निगम के होटल भी लॉकडाउन में बंद रहे, जिसके बाद इनको खोल तो दिया गया, मगर सीजन नहीं लग रहा।

विंटर सीजन में कुछ कमाई तो जरूर हुई, परंतु वह नाकाफी है। होटल बंद होने की कगार पर हैं। इन परिस्थितियों में पर्यटन विकास निगम क कर्मचारियों को भी समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। दोनों निगमों के आर्थिक हालात नासाज है, जो सरकार से ग्रांट लेकर अपने कर्मचारियों का वेतन निकाल रहे हैं।

दोनों निगमों ने ग्रांट की डिमांड को लेकर फाइल भेज रखी है, जो कि वित्त महकमे के पास पड़ी है। वित्त विभाग ने अभी तक वेतन की अदायगी की फाइल को क्लीयर नहीं किया है। बताया जाता है कि पर्यटन विकास  निगम और एचआरटीसी को वेतन अदायगी के लिए मासिक एक करोड़ रुपए की राशि चाहिए, जिसकी डिमांड सरकार से की गई हैं।

महंगाई भत्ता-अंतरिम राहत भी नहीं

निगमों के कर्मियों को महंगाई भत्ता व अंतरिम राहत की राशि की अदायगी भी नहीं हुई है। सरकार के सभी विभागों को कई महीने पहले यह अदायगी की जा चुकी है, मगर इनके कर्मचारियों को पैसा नहीं मिला। आने वाले दिनों में यदि कोरोना ज्यादा बढ़ा और हालात बिगड़ गए, तो इन दोनों निगमों की सेवाएं फिर से बाधित हो सकती हैं। तब कर्मचारियों को वेतन देना और मुश्किल हो जाएगा।

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