नूरपुर में फोरलेन विस्थापितों के जख्मों पर नहीं लगा मरहम, नहीं मिला कई प्रभावितों को मुआवजा

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नूरपुर – देवांश राजपूत

फोरलेन विस्थापितों के जख्मों पर मरहम नहीं लग सका है। कई प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिल सका है। उपमंडल नूरपुर के तहत आते पठानकोट मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के कंडवाल से सिंहुँनी तक के प्रथम चरण में 37 किलोमीटर की परिधि में बनने वाली फोरलेन योजना का निर्माण कार्य चल रहा है।

इसमें 3781 लोग प्रभावित हुए हैं जिनकी भूमि, आवास और कारोबारी स्थल योजना की भेंट चढ़े हैं। करीब 749 भवन और कारोबारी परिसर इसकी चपेट में आए हैं। जिनमें से अनेक भवनों को प्रभावितों ने तोड़ दिया है। लेकिन अभी भी अनेक प्रभावितों के परिसर यथावत हैं क्योंकि उन्हें उनके भवनों का अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।

ऐसे में प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं तो योजना का कार्य भी पूरी गति पकड़ नहीं पा सका है। योजना के कारण प्रभावित होने वाले लोगों और विभिन्न संघर्ष समितियों ने पिछले पांच सालों से अपनी मांगों को लेकर लंबा संघर्ष भी किया।

मुख्य मांग फैक्टर दो के हिसाब से चार गुना मुआवजा देने की थी

इसमें मुख्य मांग फैक्टर दो के हिसाब से चार गुना मुआवजा देने की थी क्योंकि भाजपा ने सरकार में आने से पहले अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि भूमि अधिग्रहण के चलते प्रभावित होने वाले लोगों को फैक्टर दो के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री द्वारा भी मन की बात के जरिए य़ह बात कही थी कि फैक्टर दो के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जायेगा और 2013 में इसके लिए बाकायदा संसद में अधिनियम भी पारित हुआ था। लेकिन पांच साल सरकार के बीतने के बावजूद इस मसले पर कोई गौर नहीं की गई।

और प्रभावितों की सड़क किनारे लगती बहुमूल्य भूमि को फैक्टर एक के हिसाब से मामूली मुआवजा थमा कर और 2013 के एक्ट को सरेआम ठेंगा दिखाकर प्रभावितों की भूमि औने-पौने दामों में अधिगृहित कर ली गई।

सर्कल रेट बेहद कम कर प्रभावितों को ठगा

सर्कल रेट भी बेहद कम कर दिए गए योजना के कारण इससे प्रभावित और उजड़े हुए लोग बुरी तरह कुपित हैं। प्रभावितों का मानना है कि इतने मामूली मुआवजे से वे लोग दूसरी जगह पुनः स्थापित ही नहीं हो पाएंगे जिसके लिए प्रभावित लगातार आवाज उठाते रहे लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। चूंकि अब चुनावों का दौर चल रहा है तो क्षेत्र में य़ह मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव में य़ह मुद्दा कितना प्रभाव डालता है।

यह बोले हिमाचल मानवाधिकार लोक बाड़ी अध्यक्ष राजेश पठानिया

राजेश पठानिया ने कहा कि हिमाचल मानव अधिकार लोग बाडी सरकार से यह पूछना चाहती है कि आखिर क्यों उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर फोरलेन पर योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि का ढाई प्रतिशत की बजाय नौ प्रतिशत तक का भारी भरकम बजट खर्च कर डाला और यह पूरे हिमाचल में कुल मिलाकर 331 करोड रुपये का खर्च इंफ्रास्ट्रक्चर पर एनएचएआइ ने कर डाला ।

जबकि सरकार ने इस विषय पर आंखें मूंद रखी अभी पठानकोट मंडी के पहले पैकेज में कंडवाल से सिवनी तक के लोगों को आधे अधूरे मुआवजा दिया गए हैं। लगभग 40 से 45 प्रतिशत लोगों के भवनों की मूल्य राशि और लगभग 20 से 30 प्रतिशत लोगों को अभी तक जमीन का मुआवजा भी नहीं मिला है।

जबकि सड़क का कार्य शुरू कर दिया गया है जो कि बिल्कुल भी न्याय एवं तर्कसंगत नहीं है पूर्व भाजपा सरकार ने फोरलेन परियोजना के नाम पर हजारों लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया है इसका खामियाजा उन्हें इस चुनावों में भुगतना पड़ेगा।

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