कड़ाके की ठंड में जम गई कमरूनाग झील, कोहरे की चादर से ढके शीशे सी दिख रही झील

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पाबंदी के बावजूद लगा सैलानियों-श्रद्धालुओं का तांता

मंडी – डॉली चौहान

मंडी जनपद के बड़ा देव कमरूनाग की सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक झील कड़ाके की ठंड से जाम हो गई है। करीब पांच सौ मीटर गोलाकार क्षेत्र में घने कोहरे की चादर ओढ़ चुकी यह झील अब शीशे का रूप धारण कर चुकी है।

सर्दियों के हर मौसम मे भले ही हर साल यह जाम होती रही है, लेकिन इस बार पानी से लबालब इस झील ने पहली बार करीब चार इंच घने कोहरे की चादर ओढ़ रखी है। इतनी भरकम ठंड होने तथा देवता कमेटी के बार-बार मना करने के बावजूद यहां कुछ श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आने-जाने का तांता लगा हुआ है।

श्रद्धालु कांढा, रोहांडा, जबाल, सरोआ सहित अन्य कई रास्तों से सफर तय कर समुद्र तल से नौ हजार फुट ऊंचाई वाले कमरूनाग मंदिर पहुंच रहे हैं। देवता कमेटी ने इस बार मंदिर में लगे बीजली का कनेक्शन काट दिया है।  क्योंकि शातिर इसका आधूनिक उपकरणों को चलाने मे बीजली का दुरुपयोग करते आए हैं।

यहां तक कि कई शातिर सर्दी के मौसम में बीजली बहाल रहने सेे कटर का प्रयोग करके यहां स्थापित किए गए लोहे व अन्य धातुओं से बनी कई चीजों को काटकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं। इन तमाम घटनाओं की संभावनाओं को टालने हेतु देवता कमेटी ने बीजली की सप्लाई बंद रखने का सराहनीय निर्णय लिया है।

देवता कमेटी के सदस्यों का कहना है वे लोहड़ी के दिन मंदिर पहुंचकर देवता की विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। तदोपरांत चैत्र नवरात्र के आगमन तक मंदिर के कपाट पूर्णतय: बंद कर दिए जाएंगे।

सनद रहे कुछ वर्ष पूर्व यहां शरारती तत्त्वों ने इसी ही मौसम के दौरान इस झील में जमे घने कोहरे को कुल्हाडिय़ों के साथ तोडक़र इसमे श्रद्धालुओं द्वारा मन्नतें पूर्ण होने पर चढ़ाई गई करोड़ों की नकदी सहित सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ फेरने का प्रयास किया था, लेकिन देवता कमेटी द्वारा किए गए प्रयासों के आगे डकैतों की एक नहीं चली।

लिहाजा उस घटना से सबक सीखकर कमेटी ने अब झील को सुरक्षित रखने के प्रबंध कर लिए है।

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