
इस शॉल में भगवान श्रीकृष्ण की ओर से महाभारत युद्ध में कुरुक्षेत्र में दिए गए गीता के उपदेश को हिंदी शब्दों में अंकित किया गया है। यही नहीं शॉल के दोनों बॉर्डर और ऊपर नीचे के स्थानों पर हिंदू धर्म के स्वास्तिक चिह्न, त्रिशूल, महाभारत काल के चक्रव्यूह और चौसर को भी दर्शाया गया है।
किन्नौर- एस पी क्यूलो माथास
हिंदू और बौद्ध धर्म के समावेश में बनी किन्नौरी शॉल राज्यस्तरीय जनजातीय नृत्य एवं क्राफ्ट मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें गीता सार और बौद्ध धर्म से जुड़ी कलाकारी कर जेएसडब्ल्यू के बुनकरों ने मिसाल पेश की है। शॉल की कीमत करीब एक लाख बताई जा रही है। रिकांगपिओ में सजे पांच दिवसीय राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य एवं क्राफ्ट मेले के अंतिम दिन 22 स्टॉलों में से यह स्टॉल अलग ही नजर आ रहा था।
पांच दिन में इस स्टॉल में 42 हजार रुपये का कारोबार हुआ है। इसमें जेएसडब्ल्यू के बुनकरों की ओर से 6 माह में तैयार की गई किन्नौर शॉल आकर्षण का केंद्र रही। इस शॉल में भगवान श्रीकृष्ण की ओर से महाभारत युद्ध में कुरुक्षेत्र में दिए गए गीता के उपदेश को हिंदी शब्दों में अंकित किया गया है।
यही नहीं शॉल के दोनों बॉर्डर और ऊपर नीचे के स्थानों पर हिंदू धर्म के स्वास्तिक चिह्न, त्रिशूल, महाभारत काल के चक्रव्यूह और चौसर को भी दर्शाया गया है। बौद्ध धर्म के छोहस्तन, पनमा पालपे बनाकर जेएसडब्ल्यू के बुनकरों ने बेमिसाल कारीगरी का परिचय दिया है।
शॉल तैयार करने वाले बुनकर दीवान सिंह नेगी, संतोष कुमारी नेगी, आशा कुमारी नेगी, यशोदा देवी, सुरेखा देवी ने कहा कि इस शॉल की कीमत एक लाख रुपये है। इसे अब तक बाजार में नहीं उतारा गया है। यह शॉल हिंदू मंदिरों, बोध मठों को केवल सजाने के लिए इस्तेमाल में लाई जाएगी। दीवान सिंह नेगी ने कहा है कि जेएसडब्ल्यू ने कई प्रकार की खड्डी उत्पादन के माध्यम से विभिन्न ऊनी पट्टियां, महिलाओं के लिए स्टॉल के नए डिजाइन तैयार किए हैं।
