हिमाचल को नहीं मिला केंद्र से मनरेगा का पैसा, तकनीकी सहायक और ग्रामीण रोजगार सेवकों का वेतन रुका

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शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल प्रदेश की कर्ज की सीमा 5500 करोड़ घटाने और NPA की मैचिंग ग्रांट बंद करने के बाद केंद्र सरकार ने सुक्खू सरकार को एक और झटका दिया है. मनरेगा के तहत बीते तीन महीनों से सेंट्रल शेयर नहीं आया है.

जिसके चलते ग्राम पंचायतों में तैनात हजारों तकनीकी सहायक और ग्रामीण रोजगार सेवकों का वेतन रुक गया है. इनके वेतन पर हर महीने करीब 5 करोड़ खर्च होते हैं. हिमाचल के पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने ये जानकारी दी है.

इस पूरे मामले पर कैबिनेट मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार प्रतिशोध की भावना से कार्य कर रही है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी का स्टेट शेयर भी नहीं दिया है और अब मनरेगा का पैसा भी रोका गया है. अनिरूद्ध ने कहा कि केंद्र सरकार की कथनी और करनी में अंतर, केंद्र गरीब का दर्द नहीं समझ सकती.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जिन गरीबों के घर मनरेगा से चलता हैं, उनसे आकर पूछना चाहिए कि घर का चूल्हा कैसे जलता है, घर में राशन कैसे आ रहा है. बच्चों की स्कूल फीस कैसे दी जा रही है.

क्यों नहीं मिली अब तक ग्रांट
31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की कई प्रविष्टियां दर्ज नहीं की गई थी, जिसके चलते विभिन्न कार्यों का भुगतान रुक गया. इसके लिए केंद्र डाटा एंट्री के लिए 4 जून तक की मोहलत दी है, ताकि लंबित डाटा एंट्री की जाए, इसके बाद सारा भुगतान किया जाएगा.
ये भी बताते चलें कि हिमाचल प्रदेश की कर्ज लेने की सीमा को केंद्र की मोदी सरकार ने कम कर दिया है. हिमाचल प्रदेश की लोन क्रेडिट लिमिट में केंद्र की तरफ से 5500 करोड़ रुपये की कटौती की गई है.
सत्ता परिवर्तन के 6 माह के भीतर ही हिमाचल की कर्ज लेने की सीमा को घटाया गया है. जबकि बीते जयराम राज में कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी लेकिन अब सरकार बदलते ही केंद्र ने हिमाचल को झटका दिया है.
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इस पूरे मामले पर कैबिनेट मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार प्रतिशोध की भावना से कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी का स्टेट शेयर भी नहीं दिया है और अब मनरेगा का पैसा भी रोका गया है. अनिरूद्ध ने कहा कि केंद्र सरकार की कथनी और करनी में अंतर, केंद्र गरीब का दर्द नहीं समझ सकती.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जिन गरीबों के घर मनरेगा से चलता हैं, उनसे आकर पूछना चाहिए कि घर का चूल्हा कैसे जलता है, घर में राशन कैसे आ रहा है. बच्चों की स्कूल फीस कैसे दी जा रही है.

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