विश्व प्रसिद्ध प्राचीन मसरूर मन्दिर में एक मूर्ति बनी चर्चा का विषय, सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल।
लंज – अमित शर्मा
एक ही चट्टान को काट कर बना विश्व प्रसिद्ध प्राचीन मसरूर मन्दिर के पास सराय के कमरे में रखी एक मूर्ति सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मसरूर मन्दिर में तैनात एक कर्मचारी ने मन्दिर से थोड़ी दूरी पर एक सराय में यह प्राचीन मूर्ति देखी और इसकी फ़ोटो खींच ली।
इसकी भनक जैसे ही मसरूर निवासी पर्यावरण प्रेमी सतीश कुमार को लगी, तो उसने ईमेल से इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग कांगड़ा को दी।
सतीश कुमार ने ईमेल में लिखा है कि मसरूर मन्दिर के पास एक सराय में किसी धातु की एक प्राचीन मूर्ति रखी है। उन्होंने मन्दिर में तैनात पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों पर भी सवाल उठाए हैं कि कर्मचारियों के रहते मूर्ति सराय में कैसे पहुंची और इसकी सूचना स्टाफ ने अपने उच्च अधिकारियों को क्यों नही दी।
उन्होंने पुरातत्व विभाग से आग्रह किया है कि इस मूर्ति को मन्दिर में रखा जाए। इस पर पुरातत्व विभाग कांगड़ा से एक अधिकारी मसरूर मन्दिर में आया और मूर्ति को देख कर चला गया।
सतीश का आरोप है कि पुरातत्व विभाग के अधिकारी को चाहिए था कि वह इस मूर्ति को कब्जे में लेकर मन्दिर के अंदर रखवाता। इससे मूर्ति को लेकर जनता में कई सवाल व शंकाएं पैदा होनी शुरू हो गयी हैं।
पुरातत्व अधिकारी प्रशांत के बोल
इस बारे जब पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रशांत से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह मूर्ति किसकी है इस बारे शिकायत कर्ता ही जानकारी दे सकता है और कहा कि मूर्ति किस धातु की है और कितनी पुरानी है तो इसके बारे विशेषज्ञ ही बता सकते हैं।
उन्होंने साफ कहा कि इस मूर्ति से पुरातत्व विभाग का कोई लेनदेना नहीं है। अब हैरानी इस बात की है कि धातु की बनी यह प्राचीन मूर्ति किसकी है और पुरातत्व विभाग क्यों आनाकानी कर रहा है इस पर कई सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
पंचायत उपप्रधान सुभाष के बोल
उधर, पंचायत मसरूर के उपप्रधान सुभाष ने कहा कि सराय में रखी यह मूर्ति 50 साल पहले ग्रामीणों ने खरीदी थी। इस मूर्ति का मंदिर व पुरातत्व विभाग का कोई लेना देना नहीं है।
बहरहाल मसरूर मन्दिर के पास एक सराय के कमरे में रखी प्राचीन मूर्ति सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बन गयी है।

