फिर चर्चा में सिरमौर की अनोखी शादी || दो भाइयों की पत्नी बनने वाली है मां, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में अनोखी शादी एक बार फिर सुर्खियों में है। दो भाइयों प्रदीप और कपिल नेगी से विवाह करने वाली सुनीता अब मां बनने वाली हैं।

जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि बच्चे का पिता कौन होगा और आधिकारिक दस्तावेजों में किसका नाम दर्ज किया जाएगा।

यह विवाह ‘जोड़ीदार प्रथा’ (बहुपति प्रथा) के तहत हुआ था, जो हाटी जनजाति की एक प्राचीन परंपरा मानी जाती है। हालांकि, आधुनिक समाज में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन इस शादी ने एक बार फिर इस परंपरा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

इस विषय को समझने के लिए हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार के शोध का उल्लेख महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘पॉलीएंड्री इन द हिमालयाज’ में बताया है कि इस प्रकार की शादियां मुख्यतः उन परिवारों में होती थीं, जहां जमीन और संपत्ति के बंटवारे को रोकना प्रमुख उद्देश्य होता था। इस व्यवस्था में सभी भाई एक ही महिला से विवाह करते हैं और परिवार एकजुट रहता है।

कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत बहुपति विवाह को मान्यता प्राप्त नहीं है।

ऐसे मामलों में सामान्यतः आधिकारिक दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड में बड़े भाई का नाम ही पति और बच्चे के पिता के रूप में दर्ज किया जाता है। यानी जैविक पिता कोई भी हो, कानूनी पहचान बड़े भाई की ही होती है।

हालांकि, पारंपरिक व्यवस्था में स्थिति अलग होती है। परिवार और समाज के स्तर पर सभी भाइयों को समान रूप से पति और पिता का दर्जा दिया जाता है और बच्चे की परवरिश सामूहिक जिम्मेदारी मानी जाती है। यह सामाजिक ढांचा आपसी समझ और संतुलन पर आधारित होता है।

इस रिश्ते का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पत्नी सभी पतियों के साथ समय और जिम्मेदारियों को संतुलित तरीके से निभाती है। वर्तमान में प्रदीप हिमाचल में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, जबकि कपिल विदेश में एक रेस्टोरेंट में नौकरी कर रहे हैं।

सिरमौर का यह मामला परंपरा और आधुनिकता के बीच एक अनोखा संतुलन दर्शाता है। यह जहां सामाजिक विविधता को उजागर करता है, वहीं कानून और परंपराओं के बीच के अंतर को भी सामने लाता है।

साथ ही, यह भी याद दिलाता है कि ऐसे मामलों पर टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह किसी के निजी जीवन से जुड़ा विषय है।

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