पौंग बांध विस्थापितों की समस्‍या के समाधान की जगी आस, दिल्ली में 27 को होगी अहम बैठक

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नगरोटा सूरियाँ – गुलेरिया

कोरोनाकाल के दो वर्ष के दौरान पौंग बांध विस्थापितों की समस्या का समाधान निकालने के लिए कोई बैठक नहीं हो पाई।

अब नई दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के तत्वाधान में 27 अप्रैल को होने वाली बैठक में हिमाचल सरकार की ओर से प्रधान सचिव राजस्व ओंकार शर्मा पौंग बांध विस्थापितों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

राजस्थान सरकार की ओर से भी अधिकारी शामिल होंगे और दशकों से चली आ रही समस्याओं का हल निकलने की राह में आगे बढ़ेंगे।

16 हजार परिवारों के घर समा गए थे बांध में

वर्ष 1975 में कांगड़ा जिला में बने पौंग डैम से प्रदेश के 30 हजार परिवार प्रभावित हुए थे। जिले के 339 गांवों की 75 हजार बीघा से अधिक भूमि बांध में समा गई थी।

डैम की वजह से विस्थापित हुए 30 हजार परिवारों में से 16,352 की एक तिहाई भूमि के साथ मकान भी जलाशय में समा गए।

पौंग जलाशय से इंदिरा नहर के माध्यम से राजस्थान के थार के मरुस्थल में पानी पहुंचा। राजस्थान के साथ पंजाब के कई गांवों के खेतों में इंदिरा नहर से हरियाली आई।

आठ हजार परिवारों को कुछ नहीं मिला

सर्वोच्च न्यायालय ने पुनर्वास के मुद्दे पर कमेटी बनाई, बावजूद इसके आठ हजार परिवारों को समझौते के तहत या तो राजस्थान सरकार ने भूमि मुहैया नहीं करवाई या फिर इन्हें आवंटित पट्टे रद कर दिए।

राजस्थान सरकार ने 2018 में विस्थापित परिवारों को पाकिस्तान सीमा पर स्थित जैसलमेर व बीकानेर में जमीन देने की योजना बनाई थी, मगर इन लोगों ने वहां रहने से मना कर दिया।

वहीं 2019 में प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को विस्थापितों का हिमाचल में ही पुनर्वास करने को कहा।

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