जेसीसी बैठक को कर्मचारियों के लिए छुनछुना थमाना जैसा करार दिया

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परागपुर-आशीष कुमार

मुख्यमंत्री को कर्मचारी हितैषी न होने का आरोप लगाया है। उन्होनें कहा कि जिस छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है उसमें तो पहले ही 5 साल का विलंब हो चुका है इसलिए वह तो आज या कल मिलना ही था, उसको कोई नहीं रोक सकता था।

मुख्यमंत्री ने दुसरी जरूरी मांगों को गौण कर दिया। तथाकथित तथा कर्मचारियों पर थोपा गया महासंघ कर्मचारियों की मांगों को मनवाने में नाकामयाब रहा है । ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू न कर सिर्फ 2009 की नोटिफिकेशन को मानकर कर्मचारियों के हितों के साथ कुठाराघात किया है, 2009 की नोटिफिकेशन तो ओल्ड पेंशन स्कीम का ही एक हिस्सा है।

हजारों out source कर्मचारी जो सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं, के लिए कोई पोलिसी न लाकर सरकार ने कर्मचारी हितैषी न होने का प्रमाण दिया है। सरकार ने मकान भत्ता, कंपनसेटरी भत्ता, कैपिटल भत्ता, ट्राइबल भत्ता, विंटर भत्ता, दैनिक भत्ता, आदि कई भत्तें हैं जो पिछले 4 साल से नहीं बढ़े हैं उन पर कोई बात न करके कर्मचारियों में निराशा पैदा की है। करूनाामूलक आधार पर नौकरी पाने वाले लगभग 4500 युवा लगभग 80 दिन से हड़ताल पर चल रहे हैं, के बारे में कोई पोलिसी न लाकर सरकार बहरी बनी हुई है।

जब हम आराम फरमा रहे होते हैं तो पुलिस कर्मचारी प्रहरी बनकर दिन-रात डयूटी दे रहे होते हैं परन्तु सरकार ने इनकी 8 साल की अवधि को दुसरे समकक्ष कर्मचारियों के बराबर कम न करके पुलिस वर्ग में निराशा पैदा की है और यह निराशा पिछले कल पुलिस कर्मियों के मुख्यमंत्री से मिलने से भी झलक रही है। 4-9-14 वर्ष बाद मिलने वाली वेतन वृद्धि जैसी जटिल समस्या को सरकार हल नहीं कर पाई है। जिससे हजारों कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है।

इसके अलावा सरकार ने होमगार्ड, पैरा पंप ऑपरेटर, पैराफिटर , सिलाई अध्यापक, पंचायत चौकीदार, एसएमसी टीचर, आंगनबाड़ी वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर हैल्पर, आशा वर्कर, एससीवीटी लैब टेक्नीशियन, अध्यापक, पीस मील वर्करज़ आदि बहुत सी ऐसी श्रेणियां है जिन के प्रति जयराम मुख्यमंत्री का रवैया उदासीन रहा है , जबकि ये श्रेणियां कई सालों से पीस रही हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 4 साल में सिर्फ एक जेसीसी करके उस मांग छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को माना जिसका फर्ज और दायित्व पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह जी 2 आई.आर. की किस्तें अपने मुख्यमंत्री काल में ही दे कर निभा चुके थे।

जो कॉन्ट्रैक्ट पीरियड 3 साल से 2 साल किया है वह बीजेपी के 2017 के वीजन डॉक्यूमेंट में किया गया वायदा था उसी को पूरा करने में बीजेपी ने 4 साल का विलंब कर दिया जिससे हजारों कर्मचारियों को नुकसान हुआ। वह भी इसलिए किया जब बीजेपी सरकार हाल ही में हिमाचल में चारों सीटें हार गई और आगामी चुनाव हारने के कगार पर है, इस दर्द को भांपते हुए ऐसा किया गया है अगर ऐसा नहीं होता तो यह कर्मचारी विरोधी सरकार कभी पीरियड न घटाती।

मनकोटिया ने कहा कि यह सरकार 4 साल तो गुलशर्रे उड़ाती रही, सिर्फ खनन, ड्रग, वन, ठेकेदार माफिया को प्रोत्साहित करती रही अब अंतिम पड़ाव में कुछ भी कर ले कर्मचारी इनके जुमलेवाजी और छगुफों को समझ चुकी है, अब हिमाचल का ढाई लाख कर्मचारी इन को बाहर का रास्ता दिखाकर सबक सिखाएगा।

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