कौन निगल गया चंडीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन के निर्माण में निकली मिट्टी

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निर्माण कार्य में लगी कंपनी के पास भी कोई जवाब नहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लगाया एक करोड़ आठ लाख का जुर्माना

सोलन – रजनीश ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में बन रही चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन के निर्माण कार्य के दौरान जगह-जगह इक_ा हुई मिट्टी को अवैध खननधारियों ने गायब कर दिया है। वहां कई स्थानों से मिट्टी को उठा लिया गया है, जिसका निर्माण कार्य में लगी कंपनी को कोई पता नहीं है।

इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक शिकायत मिलने पर संज्ञान लिया है और इसमें अधिकारियों से पूछा है कि आखिर वह मिट्टी कहां गई। इतना ही नहीं एनजीटी ने इसकी एवज में एक करोड़ आठ लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है और अधिकारियों को इस केस में पर्सनल अपीयरेंस के लिए कहा है।

पिछले दिनों इस मामले की सुनवाई हुई है, जिसमें अभी फैसले का इंतजार है। मगर एनजीटी ने जो आंतरिक आदेश पहले जारी किए थे, उसके अनुसार डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड से एक करोड़ आठ लाख रुपए जमा करने को कहा था। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया है।

प्रदूषण बोर्ड को कहा है कि संबंधित लोग, जो इस मामले में दोषी हैं, उनसे पैसे की वसूली की जाए या फिर डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड से इस पैसे की अदायगी की जाए। एनजीटी ने कहा है कि चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन पर काम चल रहा है और इस काम के दौरान वहां पर खुदाई हो रही है। जो निर्माणकर्ता कंपनी है, उसकी भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वहां पर हुई खुदाई के बाद निकली मिट्टी वहीं होनी चाहिए और उसका सदुपयोग होना चाहिए।

मगर एनजीटी को जो शिकायत आई है, उसमें कहा गया है कि यहां से खुदाई के दौरान निकाली गई मिट्टी को गायब कर दिया गया है, जबकि इस रेल लाइन के निर्माण में मिट्टी का उपयोग किया जा सकता था। बहरहाल इस मामले में एनजीटी सुनवाई कर रहा है, मगर सुनवाई से पहले उसने अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेशी में आने को कहा था।

इसमें उद्योग विभाग के अधिकारियों के अलावा सोलन जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी आने को कहा था। अब इन अधिकारियों ने भी अपनी ओर से जवाब फाइल कर दिया है जिसपर देखना होगा कि एनजीटी आगे क्या निर्देश देता है।

फिलहाल इस गायब हुई मिट्टी को लेकर जारी आदेशों की अनुपालना करनी पड़ी, तो एक करोड़ आठ लाख रुपए की राशि चुकता करनी होगी। अब आगे इसपर एनजीटी और नए निर्देश क्या देता है, यह देखना होगा, क्योंकि अभी मामले में सुनवाई चल रही है।

यहां बता दें कि इस मामले को लेकर पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव के साथ भी इस मामले पर चर्चा की है और एनजीटी के कड़े रुख पर बात की है।

डीसी सोलन से भी इस पर लगातार बात हो रही है और स्थानीय प्रशासन से इस पर सरकार ने जवाब मांगा है। अभी एनजीटी के सामने उनके द्वारा दिए गए जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जल्दी ही एनजीटी इसमें फाइनल ऑर्डर जारी करेगा।

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